राजकीय घोषित होने के बाद कितना बदला भगवान परशुराम महोत्सव!

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रवि शंकर शर्मा!

मोकामा में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले परशुराम महोत्सव को राजकीय महोत्सव का दर्जा तो मिल गया पर इसके बाद कितना बदलाव हुआ ये देखना भी लाजमी है!
लोगों का कहना है कि पहले जितनी व्यवस्थाएं हुआ करती थी उससे कुछ खास अधिक व्यवस्था देखने को नहीं मिल रही , इसे लेकर दलगत राजनीति और खेमेबाजी भी शुरू हो गई है!
उल्लेखनीय है की सांसद ललन सिंह और विधानपार्षद नीरज कुमार के प्रयास से इसे 2021 में राजकीय मेले का दर्जा प्राप्त हुआ, इसके लिये लोगों ने सांसद ललन सिंह और नीरज कुमार का धन्यवाद तो किया पर इसके बाद महोत्सव में व्यवस्थाएं जितनी बढ़नी चाहिये थी उतनी बढ़ी नहीं ये भी आरोप लगाया, महोत्सव को लेकर कई लोगों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किये हैँ, लोगों का कहना है की मेले में जो व्यवस्था राजकीय घोषित होने से पूर्व से ग्रामीण सिर्फ चंदे से कर लेते थे उतनी व्यवस्था भी नहीं हुई है!


जबकी सरकार से भी पैसे मिलने लगे और चंदे के रकम में भी इजाफा हुआ है!
कई लोग कैमरे के सामने नहीं आये पर उन्होंने व्यवस्था के लचर होने का आरोप लगाया, ठेकेदारों ने भी और बेहतर व्यवस्था के लिये राशि बढ़ाये जाने की माँग की, जबकी ग्रामीणों की माने तो जितनी राशि आती है उतने भी सही से खर्च नहीं हो पाते!
एक तरफ लोग खुलकर अनदेखी और अनियमितता का आरोप लगा रहे हैँ!
तो दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि इस बार पंडाल, साउंड,लाइट्स पर्याप्त पुलिस कि व्यवस्था और सीसीटीवी कि स्थापना कि गई है साथ ही जन सुविधाओं का विस्तार किया गया है,प्रशासन के दावे और जमीनी हकीकत में खास फर्क नहीं नजर आता!
पर लोगों की मानें तो प्रशासन के इस दावे में आधी हकीकत तो आधा फ़साना है!
कई लोगों ने इस स्थल पर स्थाई शौचालय, धर्मशाला और सड़क निर्माण की माँग की है!
तो कई लोग सीधे तौर पर आयोजन समिति को इसके लिये जिम्मेदार मान रहे हैँ!

Byte – मनोज कुमार, बीडीओ मोकामा
Byte- स्थानीय
Byte – स्थानीय
Byte – स्थानीय

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