आकाश कुमार की रिपोर्ट!
पूर्णिया: सीमांचल में 3 रुपया प्रति किलो सस्ती हुई प्याज, गुजरात के गोंडा से पहुंची प्याज की 16 रेंके
पूर्णिया के लोगों को प्रधानमंत्री मोदी की नगरी गुजरात के गोंडल की सस्ती प्याज खाने को मिलेगी। नासिक से प्याज की रेंकें न आने के कारण प्याज की बढ़ी कीमतों के लिहाज से भी लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्याज के लिए न तो अब लोगों को अपनी जेबें खाली करनी पड़ेगी और न ही घर जायके का स्वाद गड़बड़ाएगा।
प्याज की किल्लत से जूझ रहे सीमांचल के लिए शनिवार को राहत की खबर आई। गुजरात के गोंडा से प्याज की 16 रेंके पूर्णिया पहुंची। जिसके बाद प्याज की कीमत में 3 रूपए की कमी आएगी।

रेक लोडर व्यपारी सुरेंद्र भगत ने बताया कि देश में सर्वाधिक प्याज महाराष्ट्र के नासिक में होता है और नासिक के प्याज देश के सभी हिस्सों में भेजा जाता है लेकिन नासिक के कुछ प्याज माफिया इस खेल में कुछ ऐसा रोल निभा रहे हैं जिससे बिहार जैसे राज्य को प्याज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। नासिक में बैठे प्याज माफियाओं ने प्याज की रेक नासिक से बिहार आने से रोक लिया गया। प्याज माफियाओं की डिमांड थी रेल के भाड़े से 10% अधिक भाड़े के नाम पर उन्हें कमीशन दें। हालांकि एक राष्ट्र एक मंडी की बात कहते हुए टेक लोडर व प्याज व्यापारी ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था। व्यापारी सुरेंद्र भगत ने बताया कि इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की नगरी गुजरात के गोंडल से प्याज की 16 रेंके मंगवाई।
उपभोगता ने बताया कि इन रेंकों के आने के बाद प्याज की किल्लत से जूझ रहे कोसी सीमांचल के लोगों को राहत मिलेगी। वहीं इससे पहले प्याज की पति बोरी की कीमत 1800 रुपए थी जो घटकर 1500 हो गई है। इससे सीधे तौर पर प्रति किलो पर प्याज की कीमतों में 3 रुपए की कमी आई है। जो फिलहाल बड़ी राहत की खबर है।
ट्रांसपोर्टर ने बताया कि सीमांचल के दो करोड़ लोग प्याज का रेक नहीं आने से महंगे दामों पर प्याज खाने पर मजबूर थे। क्योंकि रेलवे रैक से भाड़ा काफी कम पड़ता है वही ट्रक के माध्यम से प्रति किलो 5 ज्यादा देना पड़ता है। जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है। नासिक से न सही मगर फिलहाल गुजरात के गोंडल से प्याज के इन रैंकों के आने के बाद उन्हें काफी हद तक राहत मिली है। हालांकि नासिक में बैठे प्याज माफिया पीएम मोदी के एक राष्ट्र एक मंडी के सपने को धत्ता दे रहे हैं। सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कारवाई करते हुए एक बार फिर से नासिक से प्याज के आने का रास्ता साफ किया जाना चाहिए। ताकि प्याज की कीमतों में और कमी आए।
वहीं मालगाड़ी के रेक से प्याज की बोरियों उतार रहे मजदूरों ने बताया कि प्याज के इन रेकों के आने के बाद रेक पॉइंट पर काम करने वाले सैकड़ों कर्मियों को रोजगार मिला है। इससे पहले वे बेरोजगार हो गए थे। लिहाजा सभी मजदूरों के लिए यह खुशी की खबर है।
बहरहाल व्यापारी सुरेंद्र चौधरी ने नासिक के प्याज माफियाओं की शिकायत स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से लेकर प्रधानमंत्री तक की है, लेकिन प्याज के इस खेल का अंत होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अभी भी नासिक स्टेशन पर मालगाड़ी खड़ी है लेकिन प्याज देने के बदले बिहार के व्यापारी सुरेंद्र को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। जरूरत है सरकार को इस दिशा में ठोस पहल करने की ताकि एक देश एक मंडी का लाभ यहां के लोग भी उठा सके।
बाइट 1- सुरेंद्र भगत, रेक लोडर व्यापारी, पूर्णिया
बाइट 2- प्रेम कुमार, व्यापारी
बाइट 3- गुलसागर पासवान, लेबर सरदार




