दरभंगा अशोक ठाकुर
गौड़ाबौराम विधानसभा क्षेत्र आजादी के सात दशक बाद भी एक पुल के लिए किरतपुर गांव के लोग तरस रहे हैं
प्रखंड मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर कोशी नदी की दो धाराओं के बीच बसा गांव एक अदद पुल के लिए तरस रहा है एकबार फिर इस गांव वालो ने श्रमदान से पुल बनाकर तैयार किया है इससे पहले बने पुल नदी की तेज धारा में बह गया था सरकार से नाराज लोगो ने इस चचरी के पुल का नाम अंबानी सेतु पुल रखकर स्थानीय विधायक और सरकार का कड़ा विरुद्ध किया है वहां के स्थानीय लोगो ने बताया कि हजारों की आबादी चचरी पुल के सहारे नदी पार करने को विवश हैं श्रमदान और ग्रामीण सहयोग के बलबूते गांव के लोग हर साल कोशी नदी पर 300 मीटर की चचरी पुल बनाते हैं नदी में अधिक पानी आने पर तेज धारा में पुल का बह जाना नियति बन गई है इसके बावजूद हर साल नवंबर से दिसंबर में पानी कम होने पर चचरी पुल का निर्माण करते हैं जान को अपने हाथों में लेकर पुल पार करते हैं ये पुल दो से तीन लाख की लागत से तैयार होता है ग्रामीणों की माने तो हर साल एक से डेढ़ लाख रुपये की लागत से चचरी पुल का निर्माण किया जाता है पांच से छह महीने तक बकोनिया,गोविंदपुर, प्रतहा, सहित दर्जनों गांव इसी पुल से डरे सहमे नदी पार करते है
वही मुकेश कुमार यादव ने बताया कि लोगों का आने जाने का मुख्य साधन नाव होती है नदी में पानी कम हो जाने के बाद चचरी पुल ही एकमात्र आने-जाने का मुख्य मार्ग रह जाता है जान हथेली पर लेकर लोग चचरी पुल से भी आना-जाना करते हैं इससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है गांव आने जाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण गांव का विकास भी ठप पड़ा है लगभग 200 से 300 यादव बाहुल्य परिवार वाले इस गांव में अस्पताल जाना हो या विद्यालय या अन्य किसी कार्य से निकलना हो तो गांव के लोगों का सहारा नाव या बांस की चचरी पुल ही होती है ग्रामीणों ने कहा की चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि निर्माण की बात करते हुए अब तक हम लोगों को छलते आए हैं पुल निर्माण कराने को लेकर विधायक से लेकर अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों तक गुहार लगाई है किसी ने अब तक पुल निर्माण में कोई सार्थक पहल नहीं की है वही स्थानीय विधायक स्वर्णा सिंह ने चुनाव से पहले ये वादा किए थे की जितने के बाद सबसे पहले इस पुल का निर्माण किया जायेगा लेकिन ये दावे चुनावी वादा बनकर रह गया




