कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!
कृषि लोन देने में सभी बैंक लगभग फिसड्डी, सरकारी दावे वादे हवा हवाई,जागीए सरकार, मुद्दा ये भी है हुजूर?
पंकज का पंच
सियासत से लेकर भले ही सत्ता तक नेता जी किसानों को आगे कर कर सीढ़ी बनाकर सरकार में जरूर शामिल हो जाते हैं। कई दावे वादे की बौछार की जाती है। शायद वो दावे वादे की बौछार नेताजी जिस हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे उसी के धूल में उड़कर धुंध में मिल गई। फिर इन किसानों के साथ नाइंसाफी क्यों हुजूर अभी रवि बुवाई का मौसम चल रहा है! जहां किसान एड़ी चोटी का जोर लगाकर कई बैंकों तक दस्तक दे रहे हैं। ताकि उन्हें कृषि लोन मिल जाए और वह आगे की रवि बुवाई कर सके, अब यहां जरा किसानों की माली हालत समझने की जरूरत है! हमने बांका के लगभग दो दर्जन गांव का दौरा किया जहां कई मध्यमवर्गीय किसान ने इस बार सूदखोर महाजन से लेकर धान की बुवाई की थी, लेकिन कुदरत की मार के आगे इन लोगों की एक ना चली और पानी के लिए किसान लगातार पानी पानी होते रहे, अपने फसल को मरते देख खुद दिन-रात तिल तिल कर किसान मरते रहे, बावजूद इनके दिल में एक उम्मीद जागी जिस तरह से सरकार फ्रंट पर आकर कह रही है लोकन से भोकल बनने की जरूरत है! तो इन दिनों बैंक के रवैया से कई किसानों की स्थिति पूर्व से और दयनीय होते जा रही है। दरअसल कुछ किसानों ने पहले लोन लिया था और उनके फसल उपज नहीं हो पाए, तो कई किसानों ने पूर्व में लोन लिया था जिनके पिता गुजर गए किसी के पति गुजर गए। और अब इन लोगों को बैंक लाल नोटिस पकड़ा रही है। निलाममाबाद ऐसे में कई गांवों में अब सुबह-सुबह मैनेजर साहब पुलिस लेकर आ जाते हैं। जहां किसान के बीच एक डर सा बनता जा रहा है और वह फिर से दिल्ली ढ
मुंबई और गुजरात की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में जब बैंक के कई बड़े अधिकारी से संपर्क साधा गया दो अधिकारी ने तो सिर्फ यह कह के पल्ला झाड़ लिया कि यह सरकार का आदेश है। बरहाल जागीर सरकार इन किसानों को कम से कम कृषि लोन जरूर मिलना चाहिए ताकि वो अपनी भी फसल की उपज सही समय पर कर सके और सरकार द्वारा ली गई ऋण को सही समय पर लौटा सके।




