फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का किया गया आयोजन!

SHARE:

रिपोर्ट – पुरुषोत्तम कुमार

-उर्दू जुबान सभी के दिलों पर करती है राज,अमन और शांति का देती है पैगाम
–फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का किया गया आयोजन
–देश की मिट्टी में है उर्दू जुबान, सीखना हम सभी का है दायित्व
–पदाधिकारियों ने जिला उर्दू नामा किताब का किया विमोचन
–स्थानीय शायर व कवियों ने किया विरोध,विवादों के बीच संपन्न हुआ कार्यक्रम

जमुई: सदर प्रखंड कार्यालय के समीप शुक्रदास भवन के सभागार में बुधवार को फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेमिनार का उदघाटन एडीएम सत्येंद्र कुमार मिश्रा,डीईओ कपिलदेव तिवारी,अपर समाहर्ता बंदोबस्त ओमप्रकाश,उर्दू कोषांग के प्रभारी राघवेंद्र कुमार दीपक,
बीडीओ श्रीनिवास,डीएसएम कालेज झाझा के प्रोफेसर डाक्टर शाहिद अख्तर ,हकीम गजाली अनवर हलाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मंच का संचालन उर्दू अनुवादक मो.सादिक के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान पदाधिकारियों ने जिला उर्दू नामा किताब का विमोचन किया।इस कार्यक्रम में जिले भर के उर्दू शिक्षक व शिक्षिकाएं सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए है। इस अवसर पर पदाधिकारियों ने उर्दू जुबान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि उर्दू इस देश की मिट्टी में पैदा हुई है। इस मुल्क के गंगा-जमुना तहजीब का इतिहास पेश करती है। उर्दू मुहब्बत की जुबान है। उर्दू सभी के दिलों पर राज करने की भाषा है। पदाधिकारियों ने आगे कहा कि उर्दू कभी नफरत का बीज नहीं बोया है। अमीर खुशरू से लेकर अब तक के इतिहास के जंग-ए-आजादी में उर्दू की ही देन है। उर्दू इस देश की पैदाइश है और यहां पली- बढ़ी है।
उर्दू सिर्फ एक मजहब की जुबान नहीं है बल्कि पूरे अवाम की जुबान है, जिसमें प्यार ही प्यार है। उर्दू जुबान अमन और शांति का पैगाम देती है। जमुई उर्दू का हब है। हर जिले की अपेक्षा जमुई में उर्दू बोलने की काफी तदाद है। उर्दू जुबान को सीखना हम सभी का दायित्व है। उर्दू , हिंदी की सगी बहन है।उर्दू को आगे बढ़ाने के लिए हम सभी लोगों को कोशिश करना चाहिए साथ ही लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। जिला उर्दू कोषांग के प्रभारी राघवेन्द्र कुमार दीपक ने कहा कि सरकार के द्वारा उर्दू शिक्षक की बहाली की गई है, इसलिए शिक्षकों को भी उर्दू पर ध्यान देना चाहिए और बच्चों को भी उर्दू की अहमियत और इसकी लोकप्रियता की तालीम देनी चाहिए। सरकार भी उर्दू के प्रचार प्रसार के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। फरोग-ए-उर्दू सेमीनार एवं मुशायरा कार्यक्रम में विभिन्न जगहों से आए कई नामचीन शायर व कवियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति पेश कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। इस दौरान लोगों ने भी शायरी और गजल का देर शाम तक लुत्फ उठाया। यूपी समेत विभिन्न जगहों से कई शायर व कवि पहुंचे थे जिन्होंने अपनी अदा और गीत से लोगों को बैठने पर मजबूर कर दिया।

हालांकि फरोग-ए-उर्दू सेमीनार एवं मुशायरा कार्यक्रम का स्थानीय शायरों ने विरोध भी किया। कार्यक्रम के दौरान रुक-रुक कर हंगामा भी होता रहा यानि पूरा कार्यक्रम हंगामा के बीच संपन्न हुआ। वरीय अधिवक्ता सह स्थानीय शायर डा. मासूम रजा अमरथवी, शिक्षक इरशाद आलम, अमानउल्लाह जखरवी सहित कई लोगों ने कार्यक्रम का विरोध करते हुए कहा कि जब जमुई के उत्थान के लिए यह कार्यक्रम किया जा रहा है तो फिर स्थानीय शायरों को कार्यक्रम में क्यूं नहीं बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सभी जमुई वासियों का था लेकिन स्थानीय शायरों को नहीं बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि इस साल इस कार्यक्रम में स्थानीय शायर जैसे डा. एसएन झा, डा. ललित कुमार, भावानंद सिंह सहित कई स्थानीय शायरों को बुलाया जाता था, लेकिन इसबार मनमानी के कारण ही कार्यक्रम में स्थानीय शायरों को नहीं बुलाया गया है। सिर्फ कार्यक्रम के नाम पर राशि का दुरूपयोग कर खानापूर्ति की जा रही है।

बाइट:- उर्दू कोषांग के प्रभारी,राघवेन्द्र कुमार दीपक

बाइट: शिक्षक,

बाइट: विरोध जताते वरिष्ठ अधिवक्ता मासूम रजा व अन्य

Join us on:

Leave a Comment