दिनकर की पंक्तियाँ सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध हथियार – पतंग!

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नीरज कुमार की रिपोर्ट :-

दुनिया में जहां भी सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ प्रतिरोध की बात आती है उसमें दिनकर की पंक्तियों को लोग हथियार के रूप में उपयोग करते हैं – अनिल पतंग

बरौनी

राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति के तत्वावधान में नौ दिवसीय दिनकर जयंती समारोह के चौथे दिन सोमवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर प्लस टू स्कूल सिमरिया में दिनकर जयंती समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल पतंग ने कहा कि दुनिया में जहां भी सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ प्रतिरोध की बात आती है उसमें दिनकर की पंक्तियों को लोग हथियार के रूप में उपयोग करते हैं। कार्यक्रम में शामिल तेघड़ा विधानसभा के पूर्व विधायक ललन कुंवर ने कहा कि सिमरिया का शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ होने से ही दिनकर जयंती का सार्थकता सिद्ध होगी। बच्चों द्वारा दिनकर की कविताओं का पाठ को सराहते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगिण विकास में दिनकर साहित्य का बहुत बड़ा योगदान होग, बच्चे दिनकर साहित्य का अध्ययन जारी रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विश्वंभर सिंह ने कहा कि बच्चों को दिनकर साहित्य से प्रेरित होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है। समिति का उद्देश्य है कि बच्चे दिनकर साहित्य से अवगत हों और दिनकर के व्यक्तित्व कृतित्व से प्रेरित होकर गांव और जनपद का नाम रौशन करे। दिनकर ने बच्चों को उर्जा भरने वाली ढेर सारी पंक्तियां लिखी हैं जिसे आत्मसात कर बच्चे अपनी मंजिल को पा सकते हैं। ग्राम रत्न राजेन्द्र राय ने कहा कि नई पीढ़ी को दिनकर साहित्य से प्रेरणा लेने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मणदेव कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कुलदीप सिंह यादव ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने दिनकर के तैल्य चित्र पर माल्यार्पण किया एवं दीप प्रज्ज्वलित किया। वहीं स्कूल के शिक्षकों एवं अतिथियों ने मिलकर केक काटकर दिनकर जी का जन्मदिन मनाया। कार्यक्रम के प्रारंभ ने स्कूली बच्चों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। वहीं 70 बच्चों ने दिनकर की कविताओं का पाठ किया। मौके पर समारोह समिति के समिति के कोषाध्यक्ष रामनाथ सिंह, ललन कुमार, संजीव फिरोज, दीनबंधु कुमार, अजीत कुमार, गुलशन कुमार, मनीष कुमार, राजेन्द्र राय, एके मनीष, स्कूल के शिक्षक शिवशंभु कुमार आदि मौजूद थे।

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