दरभंगा के सिलीप रॉय ने डिजिटल आर्ट में फहराया पताका!

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रिपोर्ट-अनमोल कुमार :-

अखिल भारतीय डिजिटल आर्ट प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार से हुए सम्मानित
पेप्सी, कोक, लेज़, कुरकुरे, होंडा जैसे 500 ब्रांड के एड में दिया योगदान

दरभंगा : बिहार के दरभंगा जिले के सिलीप रॉय ने डिजिटल आर्ट में राष्ट्रीय स्तर पर पताका फहराया है।

गांधीनगर मोहल्ला निवासी सिलीप को दिल्ली के ‘आल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट सोसाइटी’ (आयफेक्स) द्वारा 11वीं अखिल भारतीय डिजिटल आर्ट प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।
सिलीप को यह पुरस्कार उनके चित्र श्रृंखला ‘प्रवासी’ के लिए दिया गया, जिसमें उन्होंने कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की गंभीर परिस्थितियों का चित्रण किया है। उन्हें यह सम्मान विख्यात मूर्तिकार पद्मभूषण श्री राम सुतार जी के हाथों से प्राप्त हुआ। सुतार जी ने ही विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ़ यूनिटी’ बनाया है।सिलीप रॉय के मुताबिक वह क्षण बेहद रोमांचक और गौरवान्वित करने वाला था, जब पुरस्कार के लिए उनके नाम के साथ दरभंगा और बिहार जोड़ कर उद्घोषणा की गई।
ऐड एजेंसी में कॅरियर की शुरूआत 2016 में की
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से अप्लाइड आर्ट में स्नातक और स्नातकोत्तर कर चुके सिलीप ने ऐड एजेंसी में अपने कॅरियर की शुरूआत 2016 में किया। आज क्रिएटिव आर्ट डायरेक्टर व स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने देश-विदेश के 500 से अधिक ब्रांड के प्रमोशनल एड में अपना योगदान दिया है, जिनमें से माउंटेन ड्यू, पेप्सी, कोक, डोमिनोस, लेज़, कुरकुरे, होंडा, इत्यादि जैसे प्रमुख ब्रांड के लिए टीवी विज्ञापन शामिल हैं।
पिता राम सुरेश राय दरभंगा बस स्टैंड में मजदूरी करते थे
महज 6 साल के करियर में ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले सिलीप की जिंदगी कठिनाइयों से भरी रही है। पिता राम सुरेश राय दरभंगा बस स्टैंड में मजदूरी करके नौ सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। माता सरोज देवी ने पूरी जिंदगी अपनी अस्वस्थ बेटी की सेवा में समर्पित कर दिया है। दरभंगा स्टेशन पर बैठ कर निरंतर स्केच का अभ्यास करते हुए सिलीप को अपने गृहनगर से अत्यंत भावनात्मक जुड़ाव है। फिलहाल वे दिल्ली में रहते हैं लेकिन उनकी इच्छा अपने शहर लौट कर उसका कलात्मक विकास में अपना योगदान देने की हैं।

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