अरविंद कुमार की रिपोर्ट :-
प्रकृति की मार से त्रस्त किसानों को अब सरकारी सिस्टम से भी परेशानी उठाना पड़ जा रहा है । क्योंकि जो किसान धान की खेती किये हैं उन्हें अपने खेतों में पटवन के साथ यूरिया की भी जरूरत पड़ने लगी है । तो वही अब पूर्वी चंपारण जिले में यूरिया के लिये हाहाकार मचा हुआ है इफको बाजार की बात छोड़ दें तो अन्य किसी उर्वरक काउंटर पर यूरिया नगण्य है और है भी तो वो ब्लैक दामो पर किसानों को मिल रहा है । नतीजतन अधिकतर किसान इफको काउंटर पर ही पहुच यूरिया खरीदना चाह रहे हैं क्योंकि इफको काउंटर पर यूरिया सरकारी दरों पर ही मिल रहा है जबकि बाजार में दुकानदार 530 रुपए बोरी तक यूरिया बेच रहे हैं ऐसा आरोप किसान खुद लगा रहे है ।
पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन में तो किसानों के बीच मारामारी और धक्कामुकी की स्थिति बन गई है । क्योंकि यहाँ सैकड़ो की संख्या में महिला व पुरुष किसान सुबह के 3 बजे से ही यूरिया के लिए बिस्कोमान काउंटर पर पहुच कतार में खड़े हो जा रहे हैं और कुछ लोगो को जब पुरे दिन खड़े होने के बाद यूरिया नहीं मिलता है तो फिर हंगमा होना लाजमी है ।
आप खुद देखिये कितनी संख्या में महिला व पुरुष किसान भीड़ में खड़े हैं । और इतनी जद्दोजहद के बाद भी इन्हे खाली हाथ लौटना पड़ा रहा है । इस बीच इन किसानों की भिड़ंत उर्वरक बाटने वाले मैनेजर से हो गई जिसमें जमकर हंगामा भी हुआ । फिरभी लोग यूरिया के लिए डटे हुए हैं ।
वही इस मामले में जब जिला कृषि पदाधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने भी बताया कि घोड़ासहन में यूरिया को लेकर हंगामा हुआ है पर जिले में प्रयाप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है ।
लेकिन जब यूरिया उपलब्ध है तो आखर हंगामा क्यों सवाल यही उठता है ?
और अब जिला कृषि पदाधिकारी स्टॉक का जो डाटा बता रहे है कही ऐसा तो नहीं वो डाटा सिर्फ फाइलों तक ही उपलब्ध है ।
कई सवाल खड़े होते हैं जिसपर उच्चधिकारियों को तहकीकात करने की जरूरत है ताकि किसानों की परेशानी काम हो सके ।




