कहने को आदर्श स्टेशन, पर सुविधा के नाम पर निचले पायदान पर

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अरविंद कुमार की रिपोर्ट-

-:पूर्वी चंपारण जे घोड़ासहन रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओ से आज भी बंचित है कहने को तो आर्दश रेलवे स्टेशन घोड़ासहन है।

आमान परिवर्तन के बाद विघुत से संचालित होने बाली ट्रेने भले ही चलने लगी है रेलवे स्टेशनों को रंग रोगन कर सजाया और संवारा भी गया है लेकिन लचर बुनियादी सुविधाओ से आज भी घोड़ासहन रेलवे स्टेशन बंचित है। अपने गंतव्य को जाने बाले सुदुरबतीं रेलवे यात्री लम्बी दूरी तय कर स्टेशन तक तो ट्रेन के पहुंचेने से पहले पहुंच जाते हैं और ट्रेन का इंतजार करने लगते हैं यात्रियों में बुजुर्ग महिला पुरुष और बच्चे भी शामिल होते हैं । लेकिन इंतजार कि घड़ी में जब पानी और शौचालय कि आवश्यकता यात्रियों को महसूस होता है तो यात्रीगण काफी सोच में पड़ जाते हैं सोच का कारण यह है कि घोड़ासहन रेलवे स्टेशन पर पेय जल के नाम पर पांच चापाकल, और चार नल का टोपी लगाया है लेकिन एक आघ को छोड़ सभी शोभा का वस्तु बना हुआ है । प्रचंड गर्मी के इस मौसम में पानी पीने को यात्रि तरस रहे हैं ऐसे तो पैसे बाले विस्लरी ,मिनीरल जल खरीदारी कर अपनी प्यास बुझा लेते हैं लेकिन आम यात्री जल के लिए तरस कर अपनी थुक से ही प्यास बुझाने को विवस है या फिर बोतल और पोलिथीन में जल भर कर काम चलाते है। वहीं इस रेलवे स्टेशन पर पुरूष , महिला प्रसाघन केन्द्र भी है लेकिन यह भी शोभा कि वस्तु बना हुआ है इसकी स्थिति ऐसी बनी हुई है कि इसके अंदर प्रवेश करते ही उकवाई आने लगती है। नियमित शौचालय को साफ सफाई नहीं किये जाने से काफी नारकिय बनी हुई है । विभागीय लापरवाही के कारण आर्दश रेलवे स्टेशन अपनी आर्दशता को बैठी है ।लाखों कमाई के बाद भी यात्री सुविधाओं को नजरंदाज किया जाना बेईमानी साबित कर रहा रेलवे विभाग । रेलवे के वरिय पदाधिकारीयों के आगमन की सुचना पर तत्काल सारी सुविधाएं सुदृढ़ हो जाती है लेकिन वरिय पदाधिकारीयों के जाने के साथ ही फिर उसी हाल में लौट आती है।

बाइट:—- यात्री
बाइट:—- यात्री

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