मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना आधी हकीकत आधा फसाना!

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर

मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना आधी हकीकत आधा फसाना, जनता पूछ रही है क्या हुआ तेरा वादा?

देश में शुरू से ही सड़क पानी बिजली जैसे मुद्दों को लेकर नेताजी वोट मांगते हैं। और इसी कड़ी में हर घर नल का जल पहुंचाने के लिए नीतीश सरकार ने 6 वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर में नल से जल पहुंचाने का वादा किया था। हाल में ही पंचायत चुनाव संपन्न हुआ नए मुखिया जी से लेकर पुराने मुखिया जी ने इस मुद्दे को जमकर पक्ष विपक्ष का खेल खेला मुखिया जी ने जबरदस्त भोकाल फैलाया जनता की पानी की बाल्टी भले ही खाली रह जाए लेकिन मुखिया जी ने साम-दाम-दंड-भेद से अपनी वोट की बाल्टी भर ली
भले योजना धरातल पर ना उतरी हो तो अब सवाल उठता है यह योजना क्या सिर्फ वोट लेने के लिए इस्तेमाल किया गया फिलहाल आप इस योजना को आधी हकीकत आधा फसाना कह सकते हैं। और मैं यह यूं ही नहीं कह रहा हूं क्योंकि धरातल पर आप प्रवेश करेंगे तो भ्रष्टाचार के बू कहीं न कहीं आपको मिल जाएगी। अब ऐसे में इस योजना के तहत खर्च राशि सब बयां कर रही है कि क्या सिस्टम ने हर घर मैं नल का जल योजना के तहत जनता को टोपी पहनाई।

पूछ रहा है कई पंचायत?

जिस नल को दिखाकर सरकार कह रही है देखो हमने निश्चय पूर्ण किया। लेकिन कई पंचायत पूछ रहा है नल 5 साल बाद मिला तो क्या जल दसवीं साल मिलेगा। दरअसल इस योजना के तहत रजौन प्रखंड के कई ऐसे ही पंचायत के गांव हैं जहां पहले पंचवर्षीय में नल लगा दिया गया है। लेकिन जल मयस्सर नहीं अब ऐसे में सरकारी आंकड़े 75 परसेंट घरों में हर घर नल का जल पहुंचाने का दम भर रही है। अभी हाल में ही जांच के दौरान इस योजना के तहत बांका में 40 पंचायत दोषी पाए गए थे।

आखिर राशि बंदरबांट किसके इशारे पर?

अब ऐसे में सवाल उठता है कि राशि बंदरबांट किसके इशारे पर किया गया। तो कई पंचायतों में नए मुखिया जी नव निर्वाचित होकर आ गए हैं। उनके अलग बहाने हैं साहब से पूछिए तो पिछले पंचवर्षीय में हुए बस गलतियों को दोहरा दिया। अब ऐसे में इस योजना को पूरी पारदर्शी से जांच कराया जाए तो खुलकर कई बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।

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