धीरज शर्मा की रिपोर्ट
शनिवार को स्थानीय गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में भारत रत्न लता मंगेशकर जी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।जिसमें गांधी शांति प्रतिष्ठान के सदस्यों ने माल्यार्पण पुष्पांजलि और मौन रखकर उन्हें याद किया एवं उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की। इस अवसर पर आए विद्वत जनों ने उन्हें याद करते हुए उन्हें भारत की राष्ट्रीय आवाज घोषित किया। जिसकी अध्यक्षता वासुदेव भाई ने की और संचालन चांद झुनझुनवाला के द्वारा किया गया।
वासुदेव भाई ने कहा कि लता जी की आवाज संगीत की दुनिया की एकलौती आवाज है जिसे दोहराया नहीं जा सकता है। रामशरण जी ने कहा कि हम उनकी आवाज को बचपन से सुनते आए हैं और आज इस प्रकार की प्रतिभा और आवाज की आज के गायकों में कमी है लता जी जैसा समर्पण आज के गायकों को अपने गायन में लाना चाहिए।
चांद झुनझुनवाला ने कहा कि लता मंगेशकर जी भारत की रतन होने के साथ-साथ पूरे विश्व में भारत की पहचान को प्रदर्शित करती थी। साथ ही भारत के लिए भी यह गौरव के बाद थी कि लता मंगेशकर जैसी प्रतिभा भारतीय धरती पर पैदा हुई और भारत की पहचान बनी। अनीता शर्मा ने उन्हें भारत की बेटी बताते हुए कहां की उनके गीतों को हम सब अपनी डायरी में लिख कर रखा करते थे और वह आज धरोहर है। इस अवसर पर विशेष रूप से किंजल रंजन जी ने अपने गायन के द्वारा लता जी को याद करते हुए उनके गाए कुछ अमर गीतों को अपनी आवाज में गाया जैसे “ऐ मेरे वतन के लोगों” “रहे ना रहे हम” गाकर उन्हें जीवंत कर दिया किंजल जी अभी मात्र 9 वर्ष की अपनी छोटी सी उम्र में उनके द्वारा गाए गीतों को सुनाकर लोगों ने प्रोत्साहन दिया।एनुल होदा जी ने कहा कि उनकी आवाज में सरस्वती की आवाज प्रदर्शित होती थी और यह आवाज सदा ही बनी रहेगी बचपन में उन्होंने कई प्रकार के परेशानियों का सामना करते हुए भी अपने गायन को हमेशा सर्वोपरि रखा और हर छोटी से छोटी बात के प्रति सीखने के प्रति उनका लगाव रहता था। सभा में शामिल सभी लोगों ने उन्हें अपने अपनी तरफ से याद करते हुए उन्हें राष्ट्रीय आवाज घोषित किया।
साथ ही पुष्पांजलि श्रद्धांजलि एवं मौन रह कर उन्हें याद किया।




