रिपोर्ट – धर्मेंद्र कुमार!
लोक आस्था के महापर्व छठ की महिमा अब हिंदी सिनेमा के जरिए देश-दुनिया तक पहुंच रही है। चंपारण की मिट्टी से निकले गीतकार कौशल किशोर ने छठी मैया के गीत को हिंदी फिल्म में जगह दिलाकर बिहार की लोक संस्कृति और आस्था को एक बड़ा मंच दिया है। एकता कपूर की फिल्म ‘Vvaan’ में छठी मैया पर आधारित गीत को मिल रहे अपार समर्थन से चंपारण का नाम भी रोशन हुआ है।
पूर्वी चंपारण के ढाका से ताल्लुक रखने वाले गीतकार कौशल किशोर मुंबई में रहकर हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखते हैं। छठ के गीत को मिल रही लोकप्रियता के बीच वह मोतिहारी पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों के प्यार और समर्थन के लिए आभार जताया।
कौशल किशोर ने कहा कि बिहार की लोक कला और लोक आस्था के महापर्व को हिंदी फिल्मों में जगह मिलना गर्व की बात है। इस गीत को लिखने में उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। आज छठी मैया की कृपा से गीत को लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वह मोतिहारी के रहने वाले हैं और भविष्य में भी मौका मिलने पर छठ के गीतों को बड़े मंच तक पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।
फिल्म सिटी निर्माण की उठाई मांग
कौशल किशोर ने बिहार सरकार से राज्य में फिल्म सिटी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार में फिल्म सिटी बनने से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इससे बिहार में फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा मिलेगा और यहां की लोक कला, संस्कृति तथा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में बिहार के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। मुंबई में रहकर फिल्मी गीत लिख रहे कौशल किशोर आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं।
चंपारण की मिट्टी से निकली प्रतिभा, छठ की आस्था को मिला नया मंच
छठ महापर्व बिहार की पहचान और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में हिंदी फिल्म के जरिए छठी मैया के गीत का व्यापक दर्शकों तक पहुंचना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। ढाका से मुंबई तक का सफर तय करने वाले कौशल किशोर ने अपने लेखन के जरिए यह दिखाया है कि बिहार की लोक संस्कृति में देश-दुनिया तक पहुंचने की अपार क्षमता है।
चंपारण के इस लाल की उपलब्धि से स्थानीय लोगों में उत्साह है। अब उम्मीद है कि हिंदी सिनेमा में बिहार की लोक परंपराओं को और अधिक जगह मिलेगी तथा छठ जैसे महापर्व की सांस्कृतिक महत्ता व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचेगी।



