रिपोर्ट पुरुषोत्तम कुमार!
जमुई की उस शर्मनाक घटना पर जिसने पूरे बिहार को हिला दिया था, पुलिस ने आज समाहरणालय सभा कक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बड़ा खुलासा किया है।
जमुई में 19 सितंबर की शाम नाबालिग छात्रा के साथ छेड़खानी का वीडियो वायरल हुआ, लेकिन परिवार ने शिकायत नहीं की थी। 21 सितंबर को वायरल वीडियो से पुलिस को सूचना मिली, तुरंत पीड़िता की पहचान कर FIR दर्ज की गई औरSDPO दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में SIT गठित की गई।
SIT ने लगातार छापेमारी कर कल 3 आरोपियों को निरुद्ध किया था। रात भर छापेमारी चली।
आज सुबह सूचना मिली कि मुख्य 2 आरोपी प्रतापपुर गांव के बाहर नदी के बहियार में छुपे हैं।
पुलिस ने अलग-अलग टीम बनाकर घेराबंदी की। घेराबंदी देखकर एक आरोपी भागने लगा, भागने में उसे चोट आई। पकड़े जाने पर उसने नाम बताया हरेराम यादव – यही वो गमछा वाला आरोपी है जो वीडियो में दिख रहा था।
हरेराम यादव से पूछताछ में पता चला कि दूसरा मुख्य आरोपी नंदन यादव भी उसी बहियार में छुपा है। फोर्स बुलाकर पूरे बहियार की सघन तलाशी ली गई। घेराबंदी देखकर नंदन यादव ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में आत्मरक्षार्थ पुलिस को भी फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें नंदन यादव घायल हो गया। मौके से एक अवैध हथियार भी बरामद हुआ है।
इस मुख्य कांड में कुल 5 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
और वीडियो वायरल करने के मामले में साइबर थाने में अलग FIR दर्ज की गई है, 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल या साइट्स चिन्हित किए गए हैं, जिसमें जमुई के 3 लोगों को डिटेन किया गया है, जिसमें रामाशीष भी शामिल है
SP ने अपील की है कि पोक्सो और जेजे एक्ट के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना संज्ञेय अपराध है, वीडियो को शेयर न करें।
SP ने बताया दोनों आरोपी बालिग हैं और बालू और अवैध शराब कारोबार में लिप्त रहे हैं,जिनका आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।


