रिपोर्ट :- संतोष चौहान!
सुपौल :- कोशी नदी का रौद्र रूप एक बार फिर सुपौल जिले के लोगों के लिए भय और तबाही का कारण बन रहा है। सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड अंतर्गत मौजहा पंचायत के वार्ड संख्या 13 एवं 14 में इन दिनों कोशी नदी का भीषण कटाव जारी है। नदी तेजी से जमीन और बस्ती की ओर बढ़ रही है, जिसके कारण दर्जनों परिवारों के सामने विस्थापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कटाव की भयावह स्थिति को देखते हुए अब तक 10 से अधिक परिवार अपने घरों को स्वयं तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले नदी ने बांध और आसपास की जमीन को काटना शुरू किया था, लेकिन अब कटाव बस्ती तक पहुंच गया है। नदी लगातार एक के बाद एक घरों के करीब पहुंच रही है। स्थिति इतनी गंभीर बनी हुई है कि प्रभावित परिवारों को अपना सामान तक सुरक्षित निकालने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। लोग भय के माहौल में दिन-रात गुजार रहे हैं और हर पल इस आशंका में हैं कि कहीं अगला नंबर उनके घर का न हो।
मौजहा पंचायत के वार्ड संख्या 13 और 14 में कई परिवार कटाव की जद में हैं। स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए नामों में विद्यानंद यादव, संजय यादव, महेंद्र यादव, रोशन यादव और अरविंद यादव सहित कई अन्य परिवार शामिल हैं। इनके घर और जमीन नदी के लगातार बढ़ते कटाव से खतरे में हैं। विजय यादव, उपेंद्र यादव समेत अन्य ग्रामीण भी अपने आशियाने और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि लोग अपने वर्षों पुराने घरों को बचाने के बजाय उन्हें खुद ही तोड़कर सामान निकालने में जुटे हुए हैं। जिन परिवारों के घर नदी के बिल्कुल किनारे पहुंच गए हैं, वे अपने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को पहले सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे हैं। इसके बाद घरों से जरूरी सामान निकालने और माल- मवेशियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
कटाव प्रभावित परिवारों के सामने केवल घर बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि उनके सामने रोजी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य का भी संकट खड़ा हो गया है। कई लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए उनके आशियाने अब देखते ही देखते नदी में समा जाने के कगार पर हैं। ऐसे में परिवारों के पास सुरक्षित स्थान पर जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कटाव के कारण सबसे बड़ी परेशानी छोटे बच्चों और मवेशियों वाले परिवारों को हो रही है। घर उजाड़ने के बाद लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे आखिर कहां जाएं और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखें। मवेशियों के लिए चारा और रहने की जगह की समस्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रभावित इलाके में जल्द से जल्द कटावरोधी कार्य शुरू कराया जाना चाहिए, ताकि बस्ती के बाकी घरों को बचाया जा सके। साथ ही जिन परिवारों के घर कटाव के कारण उजड़ चुके हैं या उजड़ने की स्थिति में हैं, उनके लिए सुरक्षित स्थान, राहत सामग्री और पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो कोसी नदी का कटाव और अधिक परिवारों को बेघर कर सकता है। लोगों का कहना है कि नदी लगातार बस्ती की ओर बढ़ रही है और स्थिति हर घंटे बदल रही है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर तत्काल स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जरूरत है।
इधर, कोसी नदी में पानी का दबाव भी चिंता बढ़ाने वाला है। 02 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे कोसी बैराज से डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 2 लाख 22 हजार 680 क्यूसेक दर्ज किया गया। वहीं पश्चिमी कोसी मुख्य नहर में 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि पूर्वी कोसी मुख्य नहर में डिस्चार्ज शून्य रहा। इसके साथ कुल डिस्चार्ज 2 लाख 26 हजार 680 क्यूसेक दर्ज किया गया।
उधर बैराज नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के अनुसार 02 सितंबर को शाम 4 बजे बी.के.एस. पर 1 लाख 66 हजार 200 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। कोसी के बढ़ते जलप्रवाह और कई इलाकों में जारी कटाव ने नदी किनारे बसे लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
मौजहा पंचायत के वार्ड 13 और 14 की तस्वीरें और वीडियो कटाव की भयावह स्थिति को बयां कर रहे हैं। वीडियो में नदी के किनारे बसे लोगों की बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। कई परिवार अपने घरों को तोड़कर ईंट, लकड़ी और अन्य सामान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कटाव इतना तेज बताया जा रहा है कि लोगों को कई बार अपना सामान भी पूरी तरह निकालने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय लोगों की पीड़ा एक ही बात में सामने आती है—“कोसी सिर्फ हमारे घर नहीं काट रही, बल्कि हमारे सपनों और बच्चों के भविष्य को भी बहा रही है।”
अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मौजहा पंचायत के कटाव प्रभावित वार्डों का तत्काल सर्वे कराया जाए, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और बस्ती को बचाने के लिए युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य शुरू किया जाए। फिलहाल कोसी का भीषण कटाव मौजहा के वार्ड संख्या 13 और 14 के लोगों के लिए हर गुजरते दिन के साथ नया संकट पैदा कर रहा है।




