विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में कल सामूहिक अवकाश पर रहेंगे शिक्षक व कर्मचारी, मुख्यालय में देंगे धरना!

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रिपोर्ट – संतोष तिवारी!

मुजफ्फरपुर- प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। आंदोलन के दूसरे चरण के तहत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी सोमवार, 10 अगस्त 2026 को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और अपने-अपने विश्वविद्यालय मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे।

इस आंदोलन में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के सभी विश्वविद्यालय विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी शामिल होंगे। संघर्ष मोर्चा ने सभी कर्मियों से बड़ी संख्या में धरना-प्रदर्शन में पहुंचकर एकजुटता प्रदर्शित करने की अपील की है।कलमबाग रोड स्थित आवास पर एमएलसी संजय सिंह ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी

संघर्ष मोर्चा के नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 से राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अंतर्संबंध और स्वायत्तता प्रभावित होगी। इसी के विरोध में चरणबद्ध संघर्षात्मक एवं आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

11 से 25 अगस्त तक कार्यस्थल पर नारेबाजी

आंदोलन के तीसरे चरण में 11 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी प्रतिदिन दोपहर 1:30 से 2 बजे तक अपने कार्यस्थल पर एकजुट होकर प्रस्तावित विधेयक के विरोध में नारे लगाएंगे। इसका उद्देश्य विधेयक के प्रावधानों और संभावित प्रभावों को लेकर जन-जागरूकता पैदा करना है।

5 सितंबर को छात्र संवाद

आंदोलन के चौथे चरण में 5 सितंबर 2026 को शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी छात्रों के साथ संवाद करेंगे। इसमें प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक के संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी छात्रों को दी जाएगी।

संघर्ष मोर्चा के संयोजक प्रो. संजय कुमार सिंह, सदस्य राघवेन्द्र कुमार सिंह, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के संयोजक सदस्य डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता, प्रो. ललन कुमार झा, राम कुमार एवं राजीव कुमार, बुस्टा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. जयकांत सिंह और अतिथि प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. ललित किशोर ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों से आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
नेताओं ने कहा कि शिक्षक-कर्मचारी इसी तरह एकजुट होकर संघर्ष जारी रखें तो प्रस्तावित विधेयक के विरोध में बड़ी लड़ाई भी जीती जा सकती है।

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