रिपोर्ट- बिकास कुमार!
कोशी में जलस्तर बढ़ते ही तीन महीने तक कट जाता है संपर्क, अस्पताल व प्रखंड मुख्यालय पहुंचना बनता है चुनौती
सहरसा।
सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड में पूर्वी कोशी तटबंध के भीतर स्थित सात पंचायतों के हजारों ग्रामीण हर वर्ष बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करते हैं। कोशी नदी का जलस्तर बढ़ते ही इन पंचायतों का संपर्क शेष क्षेत्रों से लगभग कट जाता है, जिससे लोगों का आवागमन पूरी तरह नाव पर निर्भर हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के करीब तीन महीनों तक उन्हें प्रखंड मुख्यालय, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक एक भी सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में ग्रामीण निजी नाव संचालकों पर निर्भर हैं, जो प्रति व्यक्ति 50 से 100 रुपये तक किराया वसूलते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च काफी भारी पड़ता है। विशेषकर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। आपातकालीन स्थिति में समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने का खतरा भी बना रहता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बाढ़ अवधि में सरकारी नावों की व्यवस्था करने तथा तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित और सुलभ आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष एक जैसी समस्या के बावजूद अब तक स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।




