:- रवि शंकर अमित!
बाढ़ प्रखंड के अंतर्गत एकडंगा पंचायत के वार्ड नंबर 10 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ रोज़ाना की तरह केंद्र में करीब 30 से 35 मासूम बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे थे तभी अचानक भवन की जर्जर छत का एक भारी-भरकम प्लास्टर भरभराकर नीचे गिर गया। गनीमत यह रही कि कंक्रीट का यह मलबा ठीक उस जगह नहीं गिरा जहाँ बच्चे बैठे थे, जिससे एक बहुत बड़ी अनहोनी और कई मासूमों की जान बाल-बाल बच गई। इस खौफनाक घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। सुरक्षा के मद्देनजर फ़िलहाल केंद्र में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह से ठप्प हो गई है।
घटना के संबंध में सुबोध कुमार ने बताया कि कल जब बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, तभी अचानक आंधी के साथ बारिश होने लगी। इसी दौरान अचानक छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। रसोईया की सूझबूझ से पहले ही बच्चों को छत के क्रैक के नीचे न बैठाकर, दीवार के किनारे बैठाया था। संयोगवश, प्लास्टर ठीक उसी खाली पड़े बीच के हिस्से में गिरा, जिससे भगवान का शुक्र रहा कि सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित रहे।
इस हादसे ने विभागीय लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का यह भवन बेहद खस्ताहाल हो चुका है और इसकी दीवारें व छत कभी भी ज़मींदोज़ हो सकती हैं। घटना से सहमे अभिभावकों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस जर्जर भवन की मरम्मत नहीं की जाती तब तक वे अपने बच्चों को मौत के साए में पढ़ने के लिए बिल्कुल नहीं भेजेंगे। वर्तमान में केंद्र पर ताला लटका हुआ है, जिससे मासूमों की पढ़ाई बंद है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अनुमंडल प्रशासन व बाल विकास परियोजना पदाधिकारी से अविलंब इस मामले की जांच करने और बच्चों के लिए सुरक्षित व वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
रसोईया सविता देवी ने बताया कि वह खाना बनाने के बाद बच्चों को खिलाने जा रही थी तभी अचानक छठ का प्लास्टर टूट कर गिर गया, प्लास्टर गिरते ही बच्चे डर गए और सभी कमरे से बाहर भागने लगे। वह सभी बच्चों को ढाढस बंधाती रही। यह पूरा आंगनबाड़ी का छत से बारिश का पानी टपकता है, इससे पहले भी कई बार छत का प्लास्टर टूट कर गिर चुका है वहीं इसकी सूचना अपने बड़ीय पदाधिकारी को अब तक नहीं दिए हैं। वहीं उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, आंगनबाड़ी के पास शौचालय बनाने के लिए जमीन उपलब्ध है लेकिन कुछ लोग इसे बनाने नहीं देते हैं।
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