जहानाबाद-सेना के जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही गम में डूबा इलाका!

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पंकज कुमार जहानाबाद!

सीमा की रक्षा में समर्पित जहानाबाद के सदर प्रखंड अंतर्गत पुनीत बिगहा गांव निवासी और सेना के जांबाज जवान अवधेश कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक आवास पहुंचा, पूरा इलाका गहरे शोक में डूब गया. तिरंगे में लिपटे वीर सपूत के अंतिम दर्शन और पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. घर में शव के आते ही परिजनों की चीत्कार से माहौल इस कदर गमगीन हो गया कि वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की आंखें छलक उठीं. ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने नम आंखों से भारत माता की जय और शहीद अवधेश कुमार अमर रहें के गगनभेदी नारों के साथ अपने इस लाडले को अंतिम विदाई दी. ​मृतक जवान अवधेश कुमार अपने पिता स्वर्गीय प्रभु यादव के इकलौते पुत्र थे. बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी मां की देखरेख में उनके चाचा ने तंगी और संघर्षों के बीच उनकी पढ़ाई-लिखाई कराई. देश सेवा का जज्बा लिए अवधेश वर्ष 2012 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे. उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के लेह में हुई थी. इसके बाद करीब सात साल पहले जब वे वाघा बॉर्डर पर तैनात थे, तब अत्यधिक ठंड के कारण उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी. इसके बाद चंडीगढ़ के आरआर अस्पताल में उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी, जिससे ठीक होकर वे पुनः देश सेवा में जुट गए. ​परिजनों ने बताया कि अवधेश कुमार बीते मई महीने में एक महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे. अपनी छुट्टी पूरी कर वे वापस ड्यूटी पर लौटे ही थे कि बीते 7 जून को अचानक उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई. उन्हें आनन-फानन में दिल्ली के सैन्य अस्पताल (आरआर हॉस्पिटल) में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान हृदय गति रुकने से उनका आकस्मिक निधन हो गया. सैन्य अधिकारियों ने इसकी सूचना जैसे ही परिजनों को दी, घर में कोहराम मच गया और पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया.
बताया गया कि ​जवान के पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से गया लाया गया, जहां सेना के जवानों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी. इसके बाद पार्थिव शरीर को सबसे पहले जहानाबाद शहर के कालीनगर मोहल्ला स्थित आवास पर लाया गया. जहां सेना के जवानों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सलामी दी. इसके बाद पार्थिव शरीर को सबसे पहले जहानाबाद शहर के कालीनगर मोहल्ला स्थित आवास पर लाया गया. शव के पहुंचते ही वहां हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हो गए. कई राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वीर सपूत के घर पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
कालीनगर में श्रद्धांजलि सभा के बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव पुनीत बिगहा ले जाया गया. ​पैतृक गांव में सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी. इसके बाद गांव में ही मृतक जवान के 7 वर्षीय मासूम पुत्र ने जब अपने पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स फफक कर रो पड़ा. जवान अवधेश कुमार अपने पीछे एक बूढ़ी मां, पत्नी, 11 साल की बड़ी बेटी और दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं. उनके जाने से पूरे परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया है. ​शहीद जवान के अंतिम संस्कार में पूर्व सांसद डॉ. जगदीश शर्मा सहित जिले के कई गणमान्य लोग शामिल हुए. शोकाकुल परिवार से मिलकर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि देश की सेवा में समर्पित एक वीर जवान का इस तरह असमय चले जाना पूरे समाज और राष्ट्र के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता. वहीं, पार्थिव शरीर के साथ आए सेना के अधिकारियों ने बताया कि मृतक जवान बेहद होनहार और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान थे. उन्होंने पीड़ित परिवार को ढाढस बंधाते हुए आश्वासन दिया कि सरकार की ओर से मिलने वाले सभी अनुग्रह लाभ और सहायता राशि परिवार को जल्द से जल्द प्रदान की जाएगी.

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