सरकार द्वारा केवल जांच का आदेश तो बेदर्द संवेदनाओं का लेप भर: प्रो बलिराज!

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रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय!

भरत भूषण तिवारी की पुलिस कर्मियों द्वारा की गई निर्मम हत्या पर जागरूक नागरिकों ने जताया शोक.

आरा। जागरूक समाजसेवी युवक भरत भूषण तिवारी की पुलिस कर्मियों द्वारा की गई निर्मम हत्या पर भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वाधान में शोक सभा आयोजित कर दिवगंत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। शोक सभा की अध्यक्षता सम्मेलन के अध्यक्ष वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के सीनेटर प्रो बलिराज ठाकुर ने की। प्रोफेसर ठाकुर ने पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए ऐसे कुकर्म पर उपस्थित व्यक्तियों की ओर से निंदा प्रस्ताव पढ़ा । प्रोफेसर ठाकुर ने कहा कि इस घटना से पुलिस पर से लोगों का विश्वास उठ गया है। इस घटना की चर्चा पूरे विश्व में हो रही है, और कहा जा रहा है कि भारतीय पुलिस रक्षक है या भक्षक हो गई है। सरकार द्वारा घटना की रिटायर्ड जज द्वारा कराए जाने का आदेश तो बेदर्द संवेदनाओं का लेप भर है। अभी तक सरकार की ओर से पीड़ित परिवार के लिए कम से कम दो करोड रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की गई।सरकार की यह चुप्पी हैरान करने वाली है। केवल यहीं नहीं पीड़ित परिवार के सदस्यों सहित बिलौटी गांव के ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने का दुस्साहस मामले की लीपापोती का प्रयास है।यह दुख का विषय है कि अभी तक दोषी पुलिसकर्मियों को जेल तक नहीं भेजा गया है। प्रोफेसर ठाकुर ने कहा कि स्व भरत तिवारी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए आक्रोशित नहीं थे,वे समाज के लिए चिंतित हो कार्य कर रहे थे। भरत तिवारी की हत्या सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है।शोक सभा में दर्शनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ महेश सिंह, कवि समीक्षक जितेंद्र कुमार, सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ नंद जी दुबे, समाजसेवी शिवदास सिंह, भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिवाकर पांडे,पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, डॉक्टर नथुनी पांडे, शशिकांत तिवारी, डॉ किरण कुमारी, डॉ रेणु मिश्र,डॉ सत्यनारायण उपाध्याय,मधेश्वर पांडेय, श्री प्रकाश ओझा सहित अन्य मौजूद थे।

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