दरभंगा संवाददाता:- लक्ष्मण कुमार
पैतृक संपत्ति के लिए दर-दर भटक रही आराधना, पिता की पहचान और हक दोनों से वंचित करने का आरोप।
पिता की इकलौती संतान होने के बावजूद नहीं मिला पैतृक घर में प्रवेश।
हिस्सेदारी मांगने पर चाचा-चाची पर मारपीट और घर से निकालने का आरोप।
मैं अपने पिता की इकलौती संतान हूं, फिर मुझे मेरा हक क्यों नहीं मिल रहा — आराधना
दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत फेकला थाना क्षेत्र के सिनुरगोपाल गांव में पैतृक संपत्ति को लेकर एक बेटी के संघर्ष का मामला सामने आया है। स्वर्गीय मारकंडे झा की इकलौती पुत्री आराधना कुमारी ने आरोप लगाया है कि माता-पिता के निधन के बाद जब उन्होंने अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की, तो उनके चाचा और अन्य परिजनों ने उन्हें पहचानने से ही इनकार करना शुरू कर दिया।
आराधना का कहना है कि बचपन से वह अपने पैतृक गांव आती-जाती रही हैं और गांव के लोग उन्हें मारकंडे झा की पुत्री के रूप में जानते हैं। इसके बावजूद उन्हें अपने ही पैतृक घर के आंगन में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि 13 जून 2026 को जब वह घर पहुंचीं तो चाचा, चाची और उनके बच्चों ने उन्हें जबरन बाहर निकाल दिया तथा मारपीट भी की।
पीड़िता के अनुसार पंचायत स्तर पर संपत्ति के बदले करीब 10 लाख रुपये देकर समझौते की बात कही गई थी, लेकिन उन्होंने अपने वैधानिक हिस्से की जमीन की मांग की। इसके बाद परिवार के कुछ लोगों ने उनकी पहचान पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आराधना वास्तव में मारकंडे झा की पुत्री हैं, तो उन्हें उनके पिता की संपत्ति में कानूनी अधिकार मिलना चाहिए। वहीं आराधना ने फेकला थाना में लिखित आवेदन देकर न्याय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि वर्तमान कानून के अनुसार पुत्रियों को भी पैतृक संपत्ति में पुत्रों के समान अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया पर है कि आराधना को उनके पिता की विरासत में वैधानिक अधिकार कब तक मिल पाता है।




