‘उदन्त मार्तंड ‘प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का द्वार खुल गया:प्रो.बलिराज

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रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरा होने पर भोजपुर जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में सम्मेलन के अध्यक्ष व सीनेटर प्रो.बलिराज ठाकुर की अध्यक्षता में हिन्दी दिवस मनाया गया ।स्वागत सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ.नंदजी दूबे और संचालन भोजपुरी विभागाध्यक्ष डॉ.दिवाकर पांडेय ने किया ।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.बलिराज ठाकुर ने 30 मई 1826 को कलकत्ता से ‘उदन्त मार्तंड ‘ अख़बार निकालने वाले पंडित युगल किशोर शुक्ल को श्रद्धा पूर्वक याद करते हुए कहा कि शुक्ल जी तेजस्वी,दूरदर्शी,समर्पित साधक पत्रकार थे।उदन्त मार्तंड भले अल्पजीवी हुआ लेकिन उसके प्रकाशन से हिंदी पत्रकारिता का द्वार खुल गया ।प्रो.ठाकुर ने कहा कि मीडिया वक्त के परिवर्तन के साथ उभरी एक सही सकारात्मक निष्पक्ष लोकतांत्रिक क्रांति है जो किसी बड़े आंदोलन या परिवर्तन का दावा तो नहीं करती किन्तु परिवर्तन की दिशा में एक क्रांतिकारी भूमिका अवश्य निभा रही है ।स्वागत भाषण के क्रम में प्रो.नंदजी दूबे ने कहा कि आज पत्रकारिता साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हो चुकी है ।समाज और राजनीति को दिशा देने का कार्य हिंदी पत्रों ने सफलतापूर्वक किया है ।कवि समीक्षक जितेंद्र कुमार ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की कहानी भारतीय राष्ट्रीयता की कहानी है ।हिंदी पत्रकारिता आदि उन्नायक,जातीय चेतना,युगबोध और दायित्व के प्रति सचेत थे।जितेंद्र कुमार ने हिंदी पत्रकारिता के विभिन्न चरणों पर विस्तार से प्रकाश डाला ।संचालन करते हुए प्रो.दिवाकर पांडेय ने पत्रकारिता की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए आज की पत्रकारिता के समक्ष आनेवाली चुनौतियों की भी चर्चा की ।आज यह विशेष चिंता का विषय है कि राजनीति को संभालने वाली आज की पत्रकारिता खुद लड़खड़ाने लगी है ।समाजसेवी शिवदास सिंह ने हिंदी पत्रों पर व्यंग्य किया ।इस अवसर पर कविता पाठ करने वाले कवियों में जनमेजय ओझा,जगतनारायण सहाय,डॉ.जनार्दन मिश्र,डॉ,रेणु मिश्र,डॉ.अयोध्या उपाध्याय,डॉ.ममता मिश्र,डॉ.सत्यनारायण उपाध्याय ने किया ।इस अवसर पर रेड क्रॉस सचिव विभा कुमारी,शशिकांत तिवारी,कृष्णानंद कृष्णेन्दु ,राकेश तिवारी,डॉ.किरण कुमारी ने भी विचार व्यक्त किए ।

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