कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय में भारी अनियमितता का आरोप:कृषि मंत्री और राज्यपाल से जांच की मांग!

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रिपोर्ट – चंद्रशेखर कुमार!


नामांकन में गिरावट, जीरो प्लेसमेंट, वित्तीय गड़बड़ी और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप; डॉ. मुकेश कुमार वाधवानी और कुलपति पर उठे गंभीर सवाल

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर अंतर्गत संचालित कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता समरेश कुमार ने कृषि मंत्री एवं राज्यपाल सह कुलाधिपति, बिहार को पत्र लिखकर महाविद्यालय में कथित कुप्रबंधन, नामांकन में अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।अपने पत्र में समरेश कुमार ने आरोप लगाया है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली के मुख्य आरोपी बताए जा रहे डॉ. मुकेश कुमार वाधवानी, जो वर्तमान में कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय के प्राचार्य हैं, उनके कार्यकाल में प्रशासनिक, वित्तीय और अकादमिक अनियमितताएं चरम पर हैं। उन्होंने इस पूरे मामले में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में माननीय पटना उच्च न्यायालय एवं नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि विश्वविद्यालय में पूर्व में हुई नियुक्तियों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। समरेश कुमार का आरोप है कि वर्ष 2021 में पटना के मीठापुर स्थित ARI कैम्पस में स्थापित कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय, जो राज्य का पहला कृषि प्रबंधन महाविद्यालय माना जाता है, उसे निजी स्वार्थ और कथित भ्रष्टाचार के कारण बदहाल स्थिति में पहुंचा दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2012 की नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली के आरोपी एवं SIT जांच में मुख्य आरोपी रहे डॉ. मुकेश कुमार वाधवानी को वर्तमान कुलपति दुनियां राम सिंह द्वारा संरक्षण दिया गया। आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद उन्हें निदेशक प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठाया गया।
पत्र में यह भी कहा गया है कि डॉ. वाधवानी के निदेशक प्रशासन रहते विश्वविद्यालय में लगभग 300 से अधिक नियमित पदों पर हुई नियुक्तियों में व्यापक अनियमितता हुई, जिसकी पुष्टि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने भी की है। बाद में कृषि विभाग द्वारा उनकी संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें हटाकर नवस्थापित कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय का प्राचार्य बना दिया गया।
समरेश कुमार ने आरोप लगाया कि प्राचार्य बनने के बाद डॉ. वाधवानी और कुलपति ने कृषि विभाग को गलत जानकारी देकर महाविद्यालय को पटना के ARI कैम्पस से सबौर स्थानांतरित करा दिया, जबकि पटना में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध थीं। उनका कहना है कि इस निर्णय के बाद महाविद्यालय में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
सरकार द्वारा प्रति सत्र 30 छात्रों के नामांकन की स्वीकृति होने के बावजूद वर्तमान में नामांकन संख्या 10 तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं, छात्रों को उचित फैकल्टी, बिजनेस मैनेजमेंट एवं फाइनेंस मैनेजमेंट की पढ़ाई और प्लेसमेंट सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। आरोप है कि जीरो प्लेसमेंट और कुप्रबंधन के कारण छात्र इस संस्थान में दाखिला लेने से बच रहे हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सबौर स्थित हॉर्टिकल्चर भवन में महाविद्यालय संचालित करने के नाम पर रंग-रोगन और अन्य कार्यों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य, निविदा प्रक्रिया और सामानों की खरीद में कथित अनियमितताओं को आसान बनाने के उद्देश्य से ही महाविद्यालय को पटना से सबौर स्थानांतरित किया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कृषि मंत्री एवं राज्यपाल से मांग की है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय का संचालन पुनः ARI कैम्पस, पटना में शुरू कराया जाए। साथ ही महाविद्यालय की बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब सबकी नजर राज्य सरकार और राजभवन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
*रिर्पोट: चंद्रशेखर

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