रिपोर्ट- अनमोल कुमार!
पटना । जिसका अंदेशा था,वही कृत्य को अंजाम दिया भाजपा ने। बिहार जातिवाद राजनीति में एक नये जातिय तुष्टिकरण की राह पकडी भाजपा। एक बार फिर सवर्ण और दलित का हार हुआ,यहाँ वर्षों से सीएम पद से नदारद है यह दोनों समाज।
बिहार सीएम एक युग से जड जमा चुका अहिर,कोईरी, कुर्मी यानि त्रिवेणी संघ के ही मुरेठा मैन, विवादित काले कारनामे वाले अनगिनत दामन पर छीटे वाले सातवीं फेल तथाकथित लालू जी के राजद में रहे जंगल राज के सहभागी भाजपा के आयतित भाजपा नेता सम्राट चौधरी बिहार सीएम घोषित हुए। नये डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव और विजय चौधरी का भी ऐलान हुआ। नये जातिवाद समीकरण में भाजपा ने जातिवाद राजनीति में अपने को ढाल लिया है, एक यश मैन अपने अनूकुल विवादित को सीएम पद देकर बिहार पर थोपा है।और बिहार विकास परिकल्पना इस भाजपा का स्वांग और छलावा मात्र है, तथा बिहार में तपेदिक तपस्या तप वाले राजनीतिक योग्यताएँ को ठिकाने लगा नकार दिया है भाजपा ने। अमित शाह, मोदी वाले भाजपा पूरी तरह भाजपा की स्थापित मूल विचारधारा को त्याग कर सनातन एकता खंडित कर सनातन में ही दरार कर जातिवादी राजनीति के राह पकड़ लिया है।
राजपूत समाज को एक बार फिर हाशिये पर रखा गया भाजपा जदयू के बिहार सवर्ण राजनीति में। एक विजय चौधरी जो भूमिहार समाज के डिप्टी सीएम है ये नीतीश के दल जदयू से है और अपनी नीतीश प्रेम ,कृपा तथा अपनी कलाकारी से बने।अब पूरी तरह से बेनकाब हुआ भाजपा, का चाल,चरित्र और चेहरा। राजपूत विरोधी तो बहुत पहले से ही थी भाजपा,अब पूरी सवर्ण विरोधी है और पिछड़ा,अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति पीत, नील डाई आवरण मे समाहित हो गया है। सवर्ण इसके छदम राष्ट्वाद ,बनावटी मोह से निकले, सवर्ण राजनीति को खत्म करने पर तुला है भाजपा।बिहार के नये ताजपोशी से यूपी के योगी आदित्यनाथ जी की भी राजनीति प्रभावित होगा। यह तय है। इसलिए इससे किनारा जरूरी है। सवर्ण नेता,या सवर्ण कार्यकर्ता तो अपने अपने दल के बंधुआ मजदूर है इनकी अपनी राजनीतिक दुकान सुरक्षित रहे,बस इसी फिराक में है,इन निर्लज्ज को अपने समाज की फिक्र नही है,यह यूजीसी मैटर पर भी जाहिर हुआ है,बगावत आप जनमानस को करना है भाजपा के कुत्सित राजनीति का। इसे घर,घाट से जितना जल्दी हो उजाड़ फेके। इसी में भला है समान्य जाति का। आप एकजुट रहे तो आप में वो क्षमता तो है ही उखाड़ फेकने का। आज भी आप राजनीतिक फसल के खाद,पानी है,बिना आपके किसी की राजनितिक फसल लहलहा नहीं सकता है। याद रहे।



