थाईलैंड के अरुण मंदिर की तर्ज पर बना भव्य पंडाल, कैलाश पर्वत पर विराजे शिव, लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़!

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रिपोर्ट- सुमित कुमार

-मुंगेर जिले बरियारपुर प्रखंड के कल्याणपुर गांव में इस बार दुर्गा पूजा महोत्सव का मुख्य आकर्षण भव्य पंडाल बना हुआ है, जिसे थाईलैंड (बैंकॉक) के प्रसिद्ध अरुण मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है। पंडाल की भव्यता और अद्भुत झलक देखने प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु और दर्शक पहुंच रहे हैं।

करीब 130 फीट ऊंचे इस पंडाल को तैयार करने में 30 कारीगरों ने महीनों तक कड़ी मेहनत की है। इसे बनाने में 15 हजार बांस और कपड़े का इस्तेमाल किया गया है। पंडाल के साथ-साथ परिसर में बनाए गए कृत्रिम कैलाश पर्वत भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हैं। यह पर्वत लगभग 100 फीट ऊंचा और 150 फीट चौड़ा है, जिस पर देवों के देव महादेव की भव्य झांकी स्थापित की गई है।

भव्य आयोजन और विशेष आकर्षण

बर्नेट होम्योपैथिक प्राइवेट लिमिटेड सह हरिओम होमियो के प्रबंध निदेशक और प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. नीतीश दुबे ने बताया कि कल्याणपुर की दुर्गा पूजा वर्षों से खास धूमधाम से आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बुर्ज खलीफा की तर्ज पर पंडाल बनाया गया था, जबकि इस बार अरुण मंदिर की प्रतिकृति प्रस्तुत की गई है। इस बार बच्चों की नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।”

कल्याणपुर दुर्गा पूजा का इतिहास 362 वर्ष से भी पुराना है। यहां हर साल आयोजकों द्वारा अनूठी थीम पर पंडाल का निर्माण किया जाता है। आयोजन समिति की बेहतर व्यवस्था के कारण यह पूजा पूरे बिहार में चर्चित हो चुकी है।

वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं ने की सराहना

भव्य पंडाल और गंगा आरती को देखने के लिए मुंगेर रेंज के आईजी विकास वैभव, जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पीणिकर समेत कई वरीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि कल्याणपुर पहुंचे। आईजी ने कहा कि “एक छोटे से गांव में इतने भव्य स्तर पर आयोजन होना वास्तव में प्रशंसनीय है।” वहीं जदयू प्रदेश महासचिव सौरभ निधि और जदयू जिलाध्यक्ष नचिकेता मंडल ने भी आयोजकों की सराहना की।

पूरे क्षेत्र से उमड़ रही भीड़
कल्याणपुर दुर्गा पूजा का आकर्षण सिर्फ मुंगेर तक सीमित नहीं है। यहां की सजावट, लाइटिंग और भव्य पंडाल को देखने के लिए भागलपुर, बांका, जमुई, लखीसराय, बेगूसराय, खगड़िया और पूर्णिया तक से लोग परिवार सहित पहुंच रहे हैं। पूजा-अर्चना के साथ लोग मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद उठा रहे हैं।

कल्याणपुर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव का भी अद्भुत उदाहरण है

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