बापू की कर्म भूमि मोतिहारी से लोकनीति जनजागरण पदयात्रा में किसानों का जत्था बनारस के लिए रवाना हुआ!

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अरविंद कुमार

मोतिहारी:–मौसम विभाग के अनुसार 3 दिनों तक बारिश होना के बाबजूद भी शुक्रवार संध्या काल से लगातार हो रही बारिश के बाबजूद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 02 अक्टूबर के मौके पर गांधी जयंती पर उनकी कर्मभुमी मोतिहारी के गांधी संग्रहालय में महात्मा गांधी के साथ लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मानाई।किसानों की जथ्था लालबाबु शास्त्री कर्म भूमि एवं प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस पहुच प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के लोगो से किसानों पर बने दस काले कानूनों की सवालों की जबाब पूछेगी संयुक्त किसान मोर्चा का जत्था सामूहिक नेतृत्व में किसान जनजागरण पदयात्रा पर कूच कर बापू की ऐतिहासिक चन्दरहिया गांधी स्मारक पहुच चुकी है जहां रात्रि बिश्राम के बाद के बाद सुबह भोजन कर पुनः बनारस के लिए कूच करेगी।

इस यात्रा में करीब 2 हजार किसानों ने भारी बारिश के बावजूद गांधी संग्रहालय मोतिहारी में एकत्रित हो कर गांधी जी के मूर्ति पर पहले मल्यार्पण किया। जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता अक्षय कुमार संयोजक नव निर्माण किसान संगठन के नेतृत्व में पदयात्रा शुरु हुई। चंपारण के किसानों ने लोकनीति सत्याग्रह पदयात्री किसानों व नौजवानों का जोरदार स्वागत किया। वहीं इसके गांधी संग्रहालय स्थित नरसिंह बाबा मैदान में एक सभा का आयोजन किया गया भारी बारिश के बाबजूद किसानों में जोश देखने को मिला। सभा में बिहार के किसान नेता सह बिहार सरकार के पूर्व कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह, दिनेश सिंह, शाहिद कमाल, गांधीवादी अशोक भारत,हिमांशु तिवारी,अंकित यादव के साथ चम्पारण से किसान नेता व कार्यक्रम के संयोजक विजय पाण्डेय,हरदयाल कुशवाहा, आनंद प्रकाश,आलोक चंद्रा,आनंद कुमार,सज्जाद आलम,पूर्व विधायक रामाश्रय सिंह,रामबचन तिवारी,अशोक पाठक,आदि लोगों ने किसानों का स्वागत किया।

मोतिहारी के गांधी संग्रहालय से लोकनीति जनजागरण पदयात्रा में ओड़िशा,बिहार,उत्तर प्रदेश के साथ-साथ प्रतिनिधि के रुप में हरियाणा,पंजाब,महाराष्ट्र, दिल्ली,मध्यप्रदेश,बंगाल, झारखंड, केरल,इत्यादि राज्यों के किसान-नौजवान शामिल हुए हैं। उल्लेखनीय है कि यह पदयात्रा आज चंद्रहिया के ऐतिहासिक धरती से बनारस के लिए दूसरे दिन कूच करेगी।

गाँधी स्मारक चन्द्रहिया क्या है जाने

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक गांव है चंद्रहिया जहां गांधी जी 15 अप्रैल 1917 को मोतिहारी पहुंचे तो उसी रात उन्हें पता चला कि जसौली पट्टी में अंग्रेजों ने किसानों के साथ अत्याचार कर रहा है. गांधी जी किसानों से मिलने हाथी पर सवार होकर निकल चंद्रहिया पहुंचे तो अंग्रेज के दारोगा ने गांधी जी को चंपारण कलेक्टर डब्ल्यू बी हेकॉक द्वारा जारी नोटिस दिया जिसमें कहा गया था कि गांधी चम्पारण छोड़ो गांधी जी ने इसके खिलाफ एसडीएम(बर्तमान गांधी संग्रहालय मोतिहारी) की अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी और सत्य के आधार पर उनकी जीत हुई और किसान निलहों के अत्याचार से मुक्त कराने की लड़ाई की शंखनाद की बिगुल बजाई।

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