भ्रष्टाचार का अड्डा बना मिथिला चित्रकला संस्थान!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

मिथिला कला को प्रोत्साहन और वैश्विक आयाम देने के उद्देश्य से मधुबनी में स्थापित मिथिला चित्रकला संस्थान आज चंद लोगों की मुट्ठी में आकर धांधली और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मिथिला चित्रकला संस्थान मिथिला चित्रकला में दो तरह का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चला रहा है जिसमें सरकारी अनुदान पर प्रशिक्षण दिया जाता है। पहला, छ: महीने का सर्टिफिकेट कोर्स और दूसरा, तीन वर्ष का डिग्री कोर्स, जो कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना (एकेयू) से मान्यता प्राप्त है।
विदित हो कि तीन वर्ष के स्नातक कोर्स के लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित होती है जिसका शुल्क रूपए 1500/- प्रति अभ्यार्थी लिया जाता है, जो कि देश में किसी भी स्नातक प्रवेश परीक्षा में संभवत: सबसे अधिक है। दूसरा तथ्य यह सामने आया है कि अपने चुनिन्दा छात्रों को 10 नंबर ग्रेस देकर मेरिट लिस्ट बनाकर चयनित किया जाता है।
कारण यह दिया गया कि जो छात्र या छात्रा इस संस्थान से छ: माह का सर्टिफिकेट कोर्स करते हैं उनको स्नातक में 10 नंबर ग्रेस दिया जाता है। जबकि प्रवेश परीक्षा के लिए निर्धारित नियमावली के अनुसार किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से छः महीने का सर्टिफिकेट कोर्स करनेवाले छात्र-छात्राओं को 10 नंबर ग्रेस देने का प्रावधान किया गया है। ग्रेस नंबर के नाम पर धांधली कर अनेक प्रतिभावान प्रतिभागियों को इस संस्थान में नामांकन से वंचित किया जा रहा है। संस्थान की नजर में उद्योग विभाग, बिहार सरकार की ईकाई उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, पटना या ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा से सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले प्रतिभागियों की कोई अहमियत नहीं है। जो सर्वथा नियम के विरुद्ध और नैतिक रूप से गलत है। किसी भी समस्या के निदान के लिए छात्र-छात्राओं को सीधे एकेयू जाकर शिकायत करने की सलाह दी जाती है। करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एकेयू जाकर कितने छात्र अपने खर्च पर और कितने दिन भागमभाग करें, यह सोचकर अधिकांश प्रतिभागी चुप हो जा रहे हैं। आज के समय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग जहां हर 50 किलोमीटर पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की वकालत करती है, वहीं अपना कब्जा रखने के लिए युनिवर्सिटी से 200 किलोमीटर दूर कालेज संबद्ध कर भ्रष्टाचार को पोषित कर रही है।

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