धर्मेंद्र पांडे की रिपोर्ट!

खाट बना स्ट्रेचर और नाव बना एम्बुलेंस!
टूटा पैर तो नाव को एंबुलेंस बना पहुंचा अस्पताल!
बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान के दोनों प्रखंडों के लोगों को हर साल बाढ़ से तबाही झेलनी पड़ती है। लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं। हजारों परिवार विस्थापित होकर सड़क पर रहने को मजबूर होते हैं। कई गांव चारों ओर बाढ़ के पानी से घिरे रहते हैं। कुशेश्वरस्थान पूर्वी में साल में छह महीने से भी अधिक दिनों तक बाढ़ का पानी जमा रहता है। ऐसे में लोगों को कई तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
बाढ़ के कारण हो रही तबाही और परेशानी का जीवन्त वाकया कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के अकौन गांव का है। हाल में जब इस गांव के गणेश पंडित का भतीजा लक्ष्मण खेलने के दौरान गिर गया। इससे उसका दाहिना पैर टूट गया। इधर पूरे इलाके में बाढ़ की भयावह स्थिति से मजबूर होकर लक्ष्मण के टूटे पैर का इलाज डॉक्टर से कराने ले जाने के लिए परिजनों ने किसी तरह एक नाव की व्यवस्था की। नाव में खाट को स्ट्रेचर की तरह रखकर उसका उपयोग एम्बुलेंस के रूप में किया गया। परिजनों ने लक्ष्मण को गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूर कुशेश्वरस्थान डॉक्टर के पास पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने लक्ष्मण के टूटे पैर का समुचित इलाज कर उसे घर भेज दिया।
गणेश पंडित ने बताया कि पूरे इलाके में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ऐसे में दर्द से कराह रहे अपने भतीजे का इलाज कराने के लिए हमने नाव का सहारा लिया। घर से लगभग 10 किलोमीटर दुर डॉक्टर के पास जाना था, भाड़ा के नाव से बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचा।इस क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसी जगह है जहां बाढ़ का पानी नहीं है। लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। किसी भी काम के लिए मात्र नाव ही साधन है।




