रिपोर्ट- मो. मुर्शिद आलम!
अररिया – बिहार शिक्षक एकता मंच के आह्वान पर शनिवार की संध्या जिले के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा के मांग के समर्थन में सड़क पर उतर कर मशाल जुलूस निकाला। मशाल जुलूस बस स्टैंड से एडीबी चौक होते हुए चांदनी चौक तक गई। मशाल जुलूस का नेतृत्व कर रहे शिक्षक एकता मंच अररिया के संयोजक व शिक्षकों के मुद्दे को अपना समर्थन दे रहे फैसल जावेद यासीन ने कहा कि शिक्षक परीक्षा से नहीं डर रहे हैं। विभाग की नियत साफ नहीं है इसी से शिक्षकों को परेशानी है। शिक्षक जब दक्षता परीक्षा और टीईटी जैसी कठिन परीक्षा देकर अपनी योग्यता साबित कर चुके हैं तो बार बार परीक्षा लेने का क्या औचित्य बनता है। उन्होंने कहा कि नियोजित शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित व वर्षों पुराना मांग है बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा। नियोजित शिक्षकों को सरकार ने राज्यकर्मी बनाने की घोषणा तो की मगर उनमें जो शर्त लगा दी है वह कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बीपीएससी से जब लाखों शिक्षकों की बहाली ऑफलाइन हो सकता है तो नियोजित शिक्षकों की परीक्षा ऑफलाइन क्यों नहीं हो सकती है। सरकार ऑनलाइन व अप्रत्यक्ष रूप से नेगेटिव मार्किंग के साथ परीक्षा लेकर शिक्षकों को छटनी की जो नीति बनाई है उसे कहीं से बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ऐच्छिक स्थानांतरण की जगह जबरदस्ती शिक्षकों को अन्य जिलों में स्थानांतरण करने की नीति महिला और दिव्यांग शिक्षकों को भी कोई राहत नहीं देना सरकार की नियोजित शिक्षकों के प्रति उनकी दोहरी नीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार नियोजित शिक्षकों को बिना शर्त राज्यकर्मी का दर्जा नहीं देने की घोषणा करती है तबतक शिक्षक एकता मंच के बैनर तले शिक्षक आन्दोलन करते रहेंगे। शिक्षकों के मशाल जुलूस कार्यक्रम का अररिया किसान मंच, ड्राइवर मंच, स्टूडेंट संघ एवं अररिया का मुद्दा सहित आम नागरिकों का भी समर्थन रहा। इन सभी मंचों के सैकड़ों कार्यकर्ता शिक्षकों के साथ मशाल जुलूस में शामिल हुए।




