✍️ शंकर

सरकार ने सिस्टम को भेड़िया बनाकर हमें (आम जनता) को नोंचने के लिए छोड़ दिया है!
रोज-रोज तेल की कीमतें बढ़ाकर, महँगाई को आसमान में पहुँचाकर हमारी जेब काटने से मन नहीं भर रहा तो जुर्माना लगाने के तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। मास्क-हेलमेट, थूक-पाद… जैसे जुर्माना तो चालू है ही। भागलपुर में इन दिनों नो पार्किंग जोन के नाम पर जमकर जुर्माना वसूला जा रहा है। ठीक बात है कि शहर में यातायात सुगम रखने के लिए कढ़ाई जरूरी है। पर नो पार्किंग जोन के नाम पर वसूली से पहले शहर में पार्किंग और नो पार्किंग जोन कहाँ-कहाँ है यह बताना चाहिए ना! पटना से इसके लिये एक गाड़ी भेजी और निकल गए तसीली करने। यह तो वही बात हुई कि पटना से कोई नया हथियार भेजा जाए तो बाजार में गोली चलवाने लगेंगे।
मेरी समझ से बिना पार्किंग और नो पार्किंग जोन बताए नो पार्किंग जोन के नाम पर वसूली रंगदारी वसूलने जैसा है! अगर हाँ तो क्या जरूरत है इतने दिखावे का। हथियार आपके पास है ही, सिस्टम की ताकत भी है, राह चलते लोगों को रोकिए और डायरेक्ट पॉकेट में जितना है छीन लीजिये…!
सरकार!
सरकार नामकी संस्था जन कल्याण के लिए होती है, बचपन से यही पढ़ा था। लेकिन, अभी जन कल्याण का मतलब वोट बैंक आधारित योजनायें हैं जिनमें से अधिकतर पर भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी के आरोप लगते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर एनएच 80 पर सुल्तानगंज से मिर्जाचौकी तक का हाल देख लीजिए। ओवरलोड भारी वाहनों के कारण सड़क की धज्जियाँ उड़ी हुई है, आम जनता का चलना मुश्किल है। लेकिन इंट्री माफिया, पासर गिरोह, कुछ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी और कुछ जनप्रतिनिधियों की चांदी कट रही है। वे मौन हैं। होंगे क्यों नहीं…! कई करोड़ की अवैध वसूली है इस ओवरलोडिंग पासिंग के धंधे में।
कहने का आशय है कि सिस्टम और भ्रष्टाचारी जिसे जहां मौका लग रहा है वही वसूली में लग जा रहा है। गलत करने वालों से वसूली की बात तो समझ में आती है। उनसे जायज-नाजायज वसूली में आम लोगों का इंटरेस्ट भी नहीं है, लेकिन जब आम लोग ही नोचे जाने लगेंगे तो…!
कुल मिलाकर, सरकार अवैध वसूली वाले जरियों पर प्रहार कर वैध वसूली कराए तो सरकार का खजाना भरने लगेगा और जनता को राहत मिल सकेगी। लेकिन तब सिस्टम में बैठे भ्रष्ट लोगों का अपना खजाना नहीं भर पायेगा। नतीजा, यह सिस्टम हमारे पॉकेट पर डाका डाले हुए हैं और हद है कि सरकार को दिख ही नहीं रहा।
किस चीज की बात करूं। स्कूल फीस बढ़ गया, कहीं आने-जाने का भाड़ा बढ़ गया। सब मनमर्जी कर रहे हैं किसी को कोई भय ही नहीं कि सरकार भी है। राशन-किरासन-रसोई गैस की कीमतें रोज बढ़ रही है…! नहीं बढ़ी तो हमारी आमदनी/सैलरी। ऊपर से अब सिस्टम ऐसा खौफ पैदा कर रहा है कि नाक की जगह गलती से मुंह से सांस ले लिया तो जुर्माना लग जाएगा।
अब सवाल यह कि क्या स्थिति को अतिगंभीर बनाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। जाहिर है कि जिंदा कॉम बहुत दिन तक घुट-घुट कर जी नहीं पाएगी और विरोध में उठ खड़ी होगी।




