सत्ता के लिये मुख्यमंत्री बीमार, निगरानी विभाग कार्रवाई में हुई लाचार-विजय कुमार सिन्हा!

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:- रवि शंकर अमित!

महागठबंधन सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार चरम पर,परन्तु निगरानी द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई में कमी—विजय कुमार सिन्हा,

सत्ता के लिये मुख्यमंत्री बीमार, निगरानी विभाग कार्रवाई में हुई लाचार,

विशेष न्यायालय में निगरानी द्वारा भ्रष्टाचार के बहुत कम वाद हो रहे हैं दायर,

वारंट के वावजूद भ्रष्ट अधिकारियों की नहीं हो रही है गिरफ्तारी,

पटना 23 नवम्बर 2023

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि10 अगस्त 2022 को महागठबंधन सरकार बनने के बाद निगरानी द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई में ढील दी जा रही है। एन डी ए सरकार में इन पर हमेशा दबिश बनी रहती थी और उनमें निगरानी का भय भी बना रहता था।

श्री सिन्हा ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों में भारी उछाल आया है परन्तु निगरानी की कार्रवाई में कमी आ गई है।सरकारी कार्यालयों में विना घूस दिये कोई काम नहीं होता है ।राज्य की जनता परेशान है।मुख्यमंत्री जनता दरबार से प्रखंड स्तर तक कहीं सुनबाई नहीं है।आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे लोक सेवकों के द्वारा खुलेआम लूट की जा रही है।पर निगरानी की कार्रवाई में कमी आने से लगता है कि बिहार भ्रष्टाचार मुक्त हो गया है।

श्री सिन्हा ने कहा कि निगरानी विभाग द्वारा अचानक ट्रेप मामलों एवम अवैध अर्जित संपत्ति के अधिहरण(Confiscation) मामलों में वाद दायर करने में कमी आ गई है।प्रत्यानुपातिक धनार्जन से सम्बंधित मात्र 15 मामले दर्ज किये गए हैं।विशेष न्यायालयों में मात्र 3 वाद 2022 में दर्ज किये गए हैं।इनमें मात्र 3.42 करोड़ की राशि निहित है।लोक सेवकों औऱ गैर लोक सेवकों के विरुद्ध 81 मामलों में अंतिम प्रपत्र समर्पित किया गया है परन्तु इसका निष्पादन लम्बित है।

श्री सिन्हा ने कहा कि सरकार द्वारा लोक सेवकों पर कार्रवाई में जब्त धनराशि, भुमि का प्लोट, भवन ,वाहन औऱ ज्वेलरी का व्योरा निगरानी के प्रतिवेदन में अंकित नहीं रहता है।छापामारी के दौरान मीडिया के द्वारा निगरानी अधिकारी के हवाले अवैध अर्जित सम्पतियों का व्योरा दिया जाता है।परंतु इनका संग्रहण सरकारी कोष में होने की स्थिति अस्पष्ट रहती है।सरकार को इसे सार्वजनिक करना चाहिए ताकि राज्य की जनता तथ्यों से अवगत हो सके।जप्ती की अंतिम कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर होगी परन्तु इनके आंकड़ों को पारदर्शी रखने पर लोग सचेत रहेंगे।

श्री सिन्हा ने कहा कि वारंट जारी रहने के वावजूद भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है।गया के पूर्व पुलिस अधीक्षक आदित्य कुमार इसके उदाहरण हैं।दागी औऱ आरोपित उच्च अधिकारियों को भी नियम विरुद्ध प्रोन्नति दी जाती है।

श्री सिन्हा ने कहा कि वर्षों से निगरानी न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन के लिए विभाग द्वारा पहल नहीं की जाती है।फलस्वरूप अधिकारी में निगरानी का भय नहीं रह गया है।विशेष निगरानी इकाई को सरकार परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक बाले मामलों को सुपुर्द करती है।इसके कारण ये भी भ्रष्ट लोक सेवकों पर कार्रवाई में समय नहीं दे पाते हैं।2022 में इनके द्वारा मात्र 17 मामले दर्ज किये गए।

श्री सिन्हा ने कहा कि निगरानी विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है।राजनीतिक कारणों से मुख्यमंत्री जी व्यस्त रहते हैं और विभाग में समय नहीं दे पाते हैं।सत्ता के लिए ये सतत बीमार रहते हैं।

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