रिपोर्ट :- संतोष तिवारी!
आज बिहार निषाद संघ के तत्वाधान में वैशाली एवं मुजफ्फरपुर जिला के निषाद का कार्य चिंतन सह विराट सम्मेलन वैशाली खरौना पोखर के निकट मध्य विद्यालय परिसर में आयोजित की गई। सम्मेलन का अध्यक्षता करते हुए संघ के कार्यकारी अध्यक्ष जलेशवर सहनी ने सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर निषादों के सर्वांगीण विकास हेतु लम्बित मांगें जैसे निषादों के सभी उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने, संख्या बल के अनुरूप राजनीति में हक और अधिकार पाने, खेती योग्य नदियों के किनारे भूमि, दियारा क्षेत्र की जमीन निषादों के साथ वन्दोवस्ती करने और बालू की ॐ वन्दोवस्ती में निषादों के साथ कोटा निर्धारित करने, अति पिछडा वर्ग से सम्पन्न जातियों को तत्काल अलग कर रोहिणी आयोग के स्वरूप व्यवस्था करने, विहार राज्य मछुआरा आयोग का शीघ्र पुनगर्ठन करने एवं निषादों पर आये दिन हो रहे अत्याचार, जुल्म, हत्या पर तत्काल रोक लगाने को मुख्यमंत्री ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की। संघ के प्रदेश ई० हरेन्द्र प्रसाद निषाद ने सरकार से निषाद/मल्लाह समाज के सभी उपजातियों स्कीकरण के साथ डाटा जारी करने का आग्रह किया। प्रधान महासचिव अवध कुमार चौधरी ने कहा इस सम्मेलन में पारित प्रस्ताव पर सरकार शीघ्र कार्रवाई नहीं करती है तो पुरे बिहार में आन्दोलन शरू किया जायेगा। कार्यकारी प्रधान महासचिव धीरेन्द्र निषाद ने एन०डी०ए० और महागठबंधन राजनितिक दलों से अगामी लोक सभा चुनाव में कम से कम निषाद समाज के चार-चार उम्मीदवार बनाने की मांग की। उदघाटन करने के बाद कहा कि मैने निषाद के उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के मामले को कई बार लोक सभा में उठाया। चूकि दिल्ली और पश्चिम बंगाल में मल्लाह को अनुसुचित जाति का दर्जा मिला हुआ है। इसलिए बिहार के मल्लाहों अनुसुचित जाति में शामिल करने में केन्द्र सरकार को मान लेना चाहिए इन्होंने इसके लिए आगे भी प्रयास करने का भरोसा दिया। संघ के संरक्षक डा० राजभूषण चौधरी ने कहा कि 5 वर्षों पूर्व से निषाद




