रिपोर्ट – धर्मेंद्र कुमार
बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मुँह चिढ़ाती ये तस्वीर
जहाँ जानवरों के साथ पढ़ने को मजबूर नौनिहालों का भविष्य
_एक तरफ सरकार जहाँ शिक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त होने की दावा करती है लेकिन ये तस्वीरे बिल्कुल उल्टा है क्योंकि इस सरकारी स्कूल के पास ना तो अपना भवन है ना ही कोई और संसाधन लिहाजा बच्चे खुले आसमान में पढ़ने को मजबूर है जी हाँ हम बात कर रहे है पूर्वी चंपारण के पताही का जहाँ पर स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रामपुर मनोरथ का जहाँ पर बच्चे पशुओं के साथ बैठ कर पढ़ते है कारण ये की इस स्कूल के पास अपना भवन ही नही है जबकि इस कि स्थापना दशकों पूर्व हो चुकी है लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण आज भी ये स्कूल अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है ग्रामीण क्षेत्र में चल रही इस स्कूल सुविधा के नाम पर जीरो है क्योंकि जब भवन ही नही तो शौचालय, चापाकल, किचेन कहा से हो स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की हालत को देखते हुए पूर्व प्रखंड प्रमुख ने अपना एक पशुघर दे दिया लेकिन बच्चों का दुर्भाग्य ये की उस कमरे में मवेशियों का भी बसेरा है जिसमें जैसे तैसे बच्चे धूप बरसात से बचने के जानवरों के साथ पढ़ते है साथ ही मध्याह्न भोजन भी करते है वही दूसरी तरफ स्कूल की सच्चाई मीडिया में आने के बाद स्कूल के प्रिंसिपल अपना रोना रोते हुए कहा कि जितनी संशाधन है उसी से काम चलाते है

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