सावित्रीबाई फुले ने अपना जीवन सिर्फ लड़कियों को पढ़ाने और समाज को ऊपर उठाने में लगा दिया!

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कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):

3 जनवरी 2023 को प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज समाज सुधारक तथा नारी मुक्ति की प्रणेता राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले जी की जयंती के अवसर पर 192 वी जयंती समारोह का आयोजन रविदास आश्रम भभुआ में किया गया। यह कार्यक्रम समय संध्या 4 बजे से 7 बजे तक किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामसूरत राम सचिव अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी संघ कैमूर तथा संचालन जय शंकर राम जिला समन्वयक विकास मित्र कैमूर सह प्रदेश प्रवक्ता विकास मित्र संघ बिहार ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले सावित्रीबाई फुले की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उनके जीवनी पर विस्तृत रूप से चर्चा परिचर्चा करते हुए उनके बताए हुए सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया गया। इस कार्यक्रम के उद्घाटन कर्ता मोतीलाल गौतम भूवैज्ञानिक रहें। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राम इकबाल राम ने जॉन इंचार्ज ने कहा कि देश की सभी जाति-धर्म की लड़कियों और महिलाओं को सावित्रीबाई फुले के बारे में जानकारी अवश्य रखनी चाहिए। सावित्रीबाई फुले ने अपना जीवन सिर्फ लड़कियों को पढ़ाने और समाज को ऊपर उठाने में लगा दिया।17 साल की छोटी सी उम्र में ही सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों को शिक्षित करना शुरू किया था ।

  • पहला विद्यालय 1 जनवरी 1848 में खुला
    आरके गौतम पूर्व जिला अध्यक्ष बामसेफ ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने पहला विद्यालय 1 जनवरी 1848 में महात्मा फुले और उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले ने खोला था।सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों के लिए कुल 18 स्कूल खोलें बता दें कि उन्होंने 18 वा स्कूल भी पुणे में ही खोली थी। रमाकांत राम जिला अध्यक्ष विकास मित्र संघ कैमूर ने कहा कि सावित्रीबाई फुले जब कन्याओं को पढ़ाने के लिए स्कूल जाती थी तो रास्ते में लोग उन पर गंदी कीचड़, गोबर, विस्टा तक फेंका करते थे। इसलिए सावित्रीबाई फुले एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं। अध्यक्षता कर रहे रामसूरत राम श्री राम सूरत राम सचिव अनुसूचित जाति/ जनजाति कर्मचारी संघ कैमूर ने कहा कि लोग उन पर गोबर -माटी फेककर उनका अपमान करते रहे उसके मौजूद भी वह सब अपमान, अत्त्याचार सह कर भी भारत की बेटियों को पढ़ाती रही और उनको शिक्षित किया। अपने पति महात्मा ज्योतिबा फूले जी के साथ मिलकर लड़कियों के लिये शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों के लिये कई कार्य किये। संचालन कर रहे श्री जयशंकर राम जिला समन्वयक जिला समन्वयक प्रदेश प्रवक्ता विकास मित्र संघ बिहार ने कहा कि 10 मार्च 1897 को प्लेग महामारी में सावित्रीबाई फुले प्लेग के मरीजों की सेवा कर रही थी। प्लेग के छत से प्रभावित होकर बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी छूत लग गया और इसी कारण से इनका निधन हो गया। सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बाल हत्या प्रतिबंधक गृह नामक सेंटर की स्थापना की गई थी।
  • कार्यक्रम में ये लोग रहें शामिल।
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम इकबाल राम प्रदेश सचिव बसपा बिहार ,रमाकांत राम जिला अध्यक्ष विकास मित्र संघ कैमूर , आरके गौतम पूर्व जिला अध्यक्ष बामसेफ कैमूर ,विजय कुमार रावत ( प्रतिनिधि वार्ड पार्षद), सुधीर कुमार जिला अध्यक्ष बसपा कैमूर, संतोष कुमार बिंद बामसेफ , राजकेश्वर राम प्रोफेसर एसबीपी कॉलेज भभुआ, उपेन्द्र कुमार प्रोफेसर एसबीपी कॉलेज भभुआ उमेश कुमार शिक्षक सह युवा साहित्यकार ,शशी कुमार मित्र , सरोज कुमार, प्रखंड समन्वयक राजाराम प्रचारक रविदासिया धर्म , महेंद्र कुमार ,, कर्ण कुमार अखिलेश राम, इम्तियाज मंसूरी, संतलाल, अरुण कुमार , सुनिल कुमार सिंह कुशवाहा, भूषण कुमार,शिवमूरत बिंद पूर्व नेता बसपा बिहार शामिल रहें।

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