रिपोर्ट -अनमोल कुमार:-
एनडीए से जदयू का अलगाव राजनीतिक फैसला, इससे उनके पद का लेना-देना नहीं
नई दिल्ली : नीतीश कुमार ने बिहार में भाजपा से नाता तोड़कर अब एनडीए की बजाय महागठबंधन के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इसके बावजूद राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर हरिवंश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। यही नहीं अपनी पार्टी (जदयू) की लाइन से हट कर वे इस पद पर बने रहेंगे। यह बात जदयू के अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कही है। उनका कहना है कि हरिवंश सिंह को अपने पद से इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है। एनडीए गठबंधन से जदयू का अलग होना राजनीतिक फैसला है, जबकि वह एक सदन में डिप्टी स्पीकर हैं, जिससे इसका कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवैधानिक पद है। इसके पहले खबर आई थी कि एनडीए से अलग होने के फैसले लेने में अपनी राय न लेने से हरिवंश नीतीश कुमार से नाराज हैं। वहीं, ललन सिंह ने कहा कि हरिवंश सिंह ने खुद ही नीतीश कुमार के महागठबंधन में जाने के फैसले की सराहना की है। ललन सिंह ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा-राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन का पद सदन से जुड़ा मामला है। इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने कहा है कि मैं नीतीश कुमार जी की वजह से ही सार्वजनिक जीवन में हूं। महागठबंधन के साथ जाने का जो फैसला उन्होंने लिया है, मैं उसके साथ हूं। हालांकि खुद हरिवंश सिंह ने अब तक इस मसले पर सामने आकर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की है। ललन सिंह ने कहा कि राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर पद के लिए चुनाव हुआ था तो कई गैर-एनडीए दलों ने भी हरिवंश के लिए वोट किया था। बता दें कि जदयू के अलगाव के बाद राज्यसभा में एनडीए की ताकत भी कम हो गई है। फिलहाल सदन में 237 सदस्य हैं और जदयू के अलग होने के बाद एनडीए 109 पर आ गया है। इससे साफ है कि एनडीए के लिए अब किसी भी बिल को पास कराना थोड़ा और चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि वाईएसआर कांग्रेस, एआईएडीएमके, बीजद जैसे दलों ने कई मौकों पर एनडीए को अपना समर्थन देते रहे है।




