विभिन्न मुद्दों को लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रतिरोध मार्च निकालेगी महागठबंधन!

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संतोष तिवारी की रिपोर्ट :-

बढ़ती तानाशाही, मुस्लिमों को बदनाम करने की साजिश, बुलडोजर राज. कमरतोड़ महंगाई और लगातार बढ़ती बेराजगारी के खिलाफ महागठबंधन के आह्वान पर बिहार के जिला मुख्यालयों में प्रतिरोध मार्च निकालेगी महागठबंधन ,, इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए आज मुजफ्फरपुर में राजद कार्यालय पर एक अहम बैठक हुई ,,

इस आंदोलन में किसानों की समस्याओं को सबसे पहली श्रेणी रखा गया है ,, बेहद कम बारिश के कारण किसान हलकान है। खेतों में धान के बिचड़े सूख गए । पूरे राज्य में सूखे की स्थिति बनी हो गयी ,, समय निकल रहा है लेकिन न तो पर्याप्त बारिश हो रही है और न ही नहरों में पानी है। सरकारी नलकूप बंद पड़े है। सरकार के पास इससे निपटने की कोई योजना नहीं है। बाढ और सूखा बिहार की नियति बन गई है। जल संसाधन से समृद्ध राज्य में पिछले 17 साल से विकास का दोल पीटने वाली भाजपा-जदयू सरकार इस मामले में एक सुसंगत नीति तक नहीं बना सकी ,,

केवल जल संसाधन का मैनेजमेंट असफल नहीं है। विगत 17 वर्षों के शासन में मानव विकास सूचकांक के सभी पैमानों पर राज्य की स्थिति बद से बदतर हुई है। सरकार के लंबे चौड़े दावे के विपरीत राज्य की 51.9 प्रतिशत जनसंख्या अब भी गरीब है। अफसरों की लूट और संस्थागत भ्रष्टाचार हर रोज नए रिकार्ड बना रहे हैं। विश्वविद्यालयों के सत्र बेपटरी है। आधे से ज्यादा पद रिक्त है। दूसरी ओर मॉब लिंचिंग, अपराध, दलितों महिलाओं- अल्पसंख्यकों पर हिंसा, दलित-गरीबों की जमीन से बेदखली जहरीली शराब के जरिए जनसंहार, पलायन आदि-आज के बिहार का यही सच है। अब तो गरीबी और कर्ज के दबाव में आत्महत्या की प्रवृतियां भी खतरनाक रूप से बढ़ गई है। बुलडोजर की हनक बिहार के लिए भी आम हो गई है। लोगों के घर ढाह दिए गए। ग्रामीण इलाकों में बरसो से बसे ग्रामीण गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है।

मोदी सरकार ने तो आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। गैस सिलेंडर का दाम 1100 रु से ऊपर पहुंच गया है। किताबों पर भी जीएसटी लगा दिया गया है। आजादी के 75 वर्ष में खाद्य पदार्थों चावल, आटा, गेहूं, मैदा, सूजी, दही, छाछ, लस्सी सहित अन्य अनाजों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है। एक ओर महंगाई की मार है तो दूसरी ओर सेना में भी अब ठेका का कारोबार है। यह देश की सुरक्षा और बेरोजगारों के जीवन से खिलवाड़ है। सेना में अब महज 4 साल की बहाली होगी। छात्र-युवाओं ने जब इसका विरोध किया, तब उनपर बर्बर दमन द्वाया गया। सैकड़ो युवाओं को जेल में डाल दिया गया है।

जनता के जीने-खाने-बोलने के हक को कुचल देने पर आमादा केंद्र सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों व मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनता की खबर दिखलाने वाले पत्रकारों, फिल्मकारों आदि को भी निशाना बना रही है। तानाशाही व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ उपजे जनाक्रोश को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिए कमजोर करने की साजिश रची जाने लगी हैं। इसके लिए वे मुसलमानों के आतंकवाद का हौवा खड़ा कर रहे हैं। उत्तर- – पूर्वी भारत में मुस्लिम राजनीति व संस्कृति के एक महत्वपूर्ण केंद्र फुलवारीशरीफ को आतंकवाद का गढ़ बनाकर आज पूरे मुस्लिम समुदाय को बदनाम किया जा रहा है ,,

इस आंदोलन के मुख्य मुद्दों में सूदखोरी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के खिलाफ ,,

इस बैठक में राजद जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता , गायघाट विधायक निरंजन राय , मीनापुर विधायक राजीव कुमार उर्फ मुना यादव ,, कांटी विधायक इस्राइल मंसूरी , एमएलसी कारी सोहैब , वसीम अहमद मुन्ना , सहित सैकड़ों राजद के कार्यकर्ता मौजूद रहे ,

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