अमित कुमार की रिपोर्ट :-
पटना आजादी के अमृतमहोत्सव में सिक्किम के राज्यपाल महामहिम गंगा प्रसाद की पुस्तक स्मृति अविरल गंगा का लोकार्पण 31 जुलाई 2022 को बापू सभागार गांधी मैदान में होने जा रहा है। लोकार्पण समारोह का उद्घाटन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री. जेपी नड्डा करेंगे। श्री भड़ा जी का यह एक मात्र ऐसा सार्वजनिक कार्यक्रम होगा जिसमे जन समुदाय से सीधे मिलेंगे।
यहीं अमारोह के मुख्य अतिथि द्वय बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और सिक्किम के मख्यमंत्री प्रेम सिंह तमाग होंगे। पुस्तक का लोकार्पण बिहार के राज्यपाल श्री फागू चौहान करने। केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान समारोह के अतिविशिष्ट अतिथि होंगे। स स्वयंसेवक संघ के अ. भारतीय सह प्रचारक प्रमुख श्री अरुण जैन एवं डी.ए.वी. कॉलेज प्रबंधन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पदमश्री पूनम सूरी सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर गंगार्पण स्मारिका व आजादी अमृत महोत्सव वर्ष में श्री गंगा प्रसाद जी के 75 अनुभवों के संकलन का लोकार्पण होगा।
श्री गंगा प्रसाद जी अपने जीवन के साढ़े आठ दशक पूरा कर चुके है। आजादी के समय गंगा बाबू की उम्र करीब दस वर्ष की थी। विद्यालय के छात्र थे। आजादी के समय के उत्सव में शामिल थे। आर्यसमाज से बचपन से ही जुड़े होने के कारण वे बाल्यकाल से ही सामाजिक, सांस्कृति व राजनीतिक परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील थे। युवावस्था के प्रारंभ में ही वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। बाद में जब आरएसएस के स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की तब वे जनसंघ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने लगे। सामाजिक कार्यों में भी
उनकी सतत सक्रियता रही आर्यसमाज के माध्यम से समाज सुधार के कार्यों से लेकर आरएसएस और जन के जरिए समाजोन्नयन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। आजादी के बाद से सामाजिक, राजनीतिक परिवर्तनों को उन्होंने अत्यंत करीब से देखा। साक्षी
भाव से जो अनुभव किया वह उनकी स्मृति में आज भी संरक्षित है। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में उन्होंने अपनी स्मृतियों में संग्रहित तथ्यों को प्रकाश में लाने का निर्णय किया जो एक पुस्तक के रूप में आगामी 31 जुलाई को सबके लिए उपलब्ध होगी। आजादी के बाद स्वतंत्र भारत में राजनीतिक सामाजिक सांस्कृतिक परिवर्तनों व आपातकाल जैसी घटनाओं को समझने के लिए उनके सरमरणों व अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक एक प्रामाणिक संदर्भ दस्तावेज है। गंगा बाबू एक कार्यकर्ता जिम्मेदार पदाधारक के रूप में अपने कार्य-व्यवहार व अनुभवों को सहेज कर रखते रहे है। ऐसे में यह पुस्तक भविष्य के लिए भी एक प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में उपयोगी होगी।
सात अध्यायों व चित्रावलियों में विभाजित यह पुस्तक गंगा बाबू के प्रारंभिक जीवन से लेकर आर्यसमाज में उनकी भूमिका आपातकाल की सिहरन भरी यादों, उनके राजनीतिक सफर संसदीय व संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन को न केवल उद्भाषित करती है बल्कि समयः सापेक्ष साक्ष्यों को भी प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली ने किया है तथा इसके शोधन एवं संपादन का दायित्व वरीष्ठ पत्रकार द्वय श्री राकेश प्रवीर एवं श्री कृष्ण कांत ओझा ने निर्वहन किया है। पुस्तक एवं स्मारिका की रूप-रेखा तैयार करने में श्री गंगा प्रसाद अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशन समिति के संयोजक पदमश्री बिमल जैन एवं श्री गंगा प्रसाद के सुपुत्र व विधायक डा. संजीव चौरसिया की महती भूमिका रही है।




