सांस्कृतिक चेतना जगाने वाले युगद्रष्टा थे गुरुदेव टैगोर!

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मनोज कुमार की रिपोर्ट

  • विश्वविख्यात कवि,साहित्यकार
    दार्शनिक, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर भारतीय सांस्कृतिक चेतना जगाने वाले युगदृष्ठा थे _ मिठू *
    गया स्थानीय चौक स्थित इंदिरा गांधी प्रतिमा स्थल प्रांगण में महान स्वतंत्रता सेनानी, विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक,भारतीय साहित्य के नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर जी की 161 वीं जयंती मनाई गई।
    सर्वप्रथम रविंद्र नाथ टैगोर जी के चित्र पर माल्यार्पण के पश्चात उनके व्यक्तित्व एवम् कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला गया।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य सह क्षेत्रीय प्रवक्ता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रो विजय कुमार मिठू ने कहा की गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर एशिया महादेश के पहले विद्वान व्यक्ति थे जिन्हे साहित्य नोबल पुरस्कार मिला था, तथा ये एक ऐसे सख्त थे जो भारत ही नहीं बल्कि बंगलादेश के भी राष्ट्र गान के रचियाता है।
    पूर्व सांसद रंजीत सिंह उर्फ रंग बाबू ने कहा की भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमेशा इनसे जटिल समस्याओं के हल निकालने में मदद लेते थे,जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद इन्होंने रजा जार्ज पंचम द्वारा दी गई नाइट हुड की पदवी लौटा दी थी।
    जयंती समारोह को जिला उपाध्यक्ष राम प्रमोद सिंह, दामोदर गोस्वामी, अभिषेक श्रीवास्तव, हितेंद्र नाथ चक्रवर्ती, असरफ इमाम, विनोद बनारसी, टिंकू गिरी, ओंकार नाथ सिंह, उदय शंकर पालित, सुभाष चन्द्र, अरुण कुमार पासवान, सुरेन्द्र मांझी, आदि ने संबोधित किया।
    नेताओं ने केंद्र सरकार से गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर जी की जीवनी सम्पूर्ण भारत के पाठ्यक्रम में इनकी जीवनी पढ़ाने, शैक्षणिक संस्थानों में इनकी जयंती के दिन गोष्ठी, सेमिनार का आयोजन कराने की मांग किया है।

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