आम चुनाव के विरुद्ध अनिश्चित कालीन धरना व प्रदर्शन!

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निलांबुज कुमार झा की रिपोर्ट

तदर्थ समिति द्वारा आम चुनाव के विरुद्ध अनिश्चित कालीन धरना व प्रदर्शन का हुआ आयोजन

सोमवार को तदर्थ समिति द्वारा वित्तीय अनियमितता तथा अवैधानिक आम चुनाव के विरुद्ध अनिश्चित कालीन धरना व प्रदर्शन अधिवक्ता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष श्री मदन मोहन मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ! धरना में शामिल अधिवक्ता शाहिद मंजूर, आसिफकमाल,कपिलदेव कुमार, पूर्व कार्य कारिणी सदस्य अजीत सोनू,महेश यादव,राकेश रोशन उर्फ़ राजू यादव ,राजेंद्र दर्वे मोर्चा के संयोजक राजीव कुमार झा आदि ने सम्बोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर से पिछले एक वर्ष से लगातार विधिज्ञ संघ में तदर्थसमिति द्वारा घोर वित्तीय अनियमितता तथा अवैधानिक चुनाव का मुखर रूप से विरोध किया। मदन मोहन मिश्रा ने आम अधिवक्ता से इस अवैधानिक चुनाव के बहिस्कार की मांग की। राजीव कुमार झा ने माननीय उच्च न्यायालय पटना के सिविल रिट 1051/2013 संजय मोदी बनाम चेयरमैन स्टेट बार कौंसिल पटना वगैरह में दिये गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इस तदर्थ समिति को किसी भी अधिवक्ता का नाम काटकर उसे अपने व्यवसाय को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है क्योंकि ये कोई समिति नहीं है जिसे निर्वाचित समिति की तरह ऐसे कठिन निर्णय लेने का अधिकार हो वावजूद उसकी अवमानना करके जो लगातार असंवैधानिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है वह निःसंदेह क़ानून को ठेंगा दिखाने जैसा है औऱ इसकी पुरजोर निंदा करते हैं। कपिलदेव कुमार ने कहा कि ये विद्वानों का संघ है औऱ यहाँ गोली औऱ हिंसा की बात करने वाले की कोई जगह नहीं है, यहाँ जात पात में बाँट कर अखाडा बनाने की बात करने वालों को लोकतान्त्रिक तरीके से मुँह तोड़ जबाब दिया जायेगा। अजीत सोनू ने कहा कि इस केयर टेकर समिति के काले करनामों के कारण इसको मूर्ख कहने में कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि पत्रांक 92-21/22 दिनांक 25/3/22 को सहायक निर्वाची पदाधिकारी को प्रेषित पत्र पूरी तरह गलत किया गया। राकेश रोशन ने माननीय उच्च न्यायालय पटना के उस रिट को पढ़कर सार्वजनिक किया औऱ कहा कि हमें कोई कमजोर ना समझे, महेश यादव ने पूर्व क़ी सारी घटना पर प्रकाश डाला, आसिफ कमाल ने कहा कि वे इस मोर्चा के सभी सदस्यों को वधाई देते हैं जिन्होंने अंजाम से बेखबर होकर सत्य को उदघाटित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है,तथा विनोद यादव का निर्वाची पदाधिकारी के रूप में मनोनयन बिल्कुल गलत है क्योंकि वे उसी केयर टेकर समिति का सदस्य है जिस पर घोर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगता रहा है। शाहिद मंजूर ने कहा कि इस अराजकता के पीछे जिन लोगों का हाथ है वे भी आपराधिक षड्यंत्र के गुनहगार हैं औऱराजेंद्र दर्वे ने कहा कि तीन बार निर्वाचित दिवंगत महासचिव की विधवा पत्नी पर जिस तरह हैवान की तरह चारित्रिक छिंटाकशी व लांछन लगाकर जो अपराध किया है उसे अधिवक्ता समाज कभी माफ नहीं करेगा। हमारे स्थानीय स्टेट बार कौंसिल सदस्य की अदूरदर्शिता,अकर्मन्यता,
संवेदनहीनता औऱ किंचित मोह के कारण पद औऱ गरिमा का बेजा इस्तेमाल कर जिस तरह आम अधिवक्ता व संघ को उसके हाल पर छोड़ दिया गया वह निश्चित रूप से निंदनीय है।
इसलिए ऐसे काले कारनामों का पुरजोर विरोध विरोध बेहद आवश्यक है। सभा में वक्ताओं के अलावे विनय मिश्रा,बिपिन तिवारी, रवि रंजन,फैयाज़ अविजीत झा, हरिओम मिश्रा, नसर, इम्तियाज़ सुधीर सिंह, मोना गुप्ता, बबलू मल्लिक आदि अनेक अधिवक्ता शामिल हुए।

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