धीरज शर्मा की रिपोर्ट
भगत सिंह,सुखदेव व राजगुरु शहादत दिवस के मौके पर सामाजिक न्याय आंदोलन(बिहार) के बैनर तले ‘बहुजन आंदोलन:दृष्टि,एजेंडा व दिशा’ विषय पर राष्ट्रीय स्तर का विमर्श का
आयोजन किया गया।
इस मौके पर चर्चित बुद्धिजीवी व पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि बहुजन दृष्टि का मूल तत्व समानता,बराबरी व आजादी है.बहुजन दृष्टि सोशल ईंजीनीयरिंग का पर्याय नहीं है.सोशल ईंजीनीयरिंग के जरिए सामाजिक न्याय और बदलाव की राजनीति आगे नहीं बढ़ सकती है।
पूर्व राज्यसभा सदस्य व ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के अध्यक्ष अली अनवर अंसारी ने कहा कि सामाजिक न्याय की राजनीतिक धाराओं के पास स्पष्ट व ठोस विचारधारा नहीं है.’ए टू जेड’ और ‘सर्वजन’ के नारे के साथ बहुजन दृष्टि का रिश्ता नहीं बनता।
कथाकार व सामाजिक कार्यकर्ता रामजी यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय की बात करने वाली छद्म समाजवादियों ने सामाजिक न्याय के ठोस सवालों पर डटने-टिकने का काम नहीं किया.भूमि सुधार,शिक्षा अधिकार,शासन-सत्ता व कारोबार में दलितों-आदिवासियों व पिछड़ों की हिस्सेदारी की लड़ाई को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया.
विमर्श की शुरुआत रिंकु यादव ने की,संचालन रामानंद पासवान ने
की और अतिथियों का स्वागत अर्जुन शर्मा ने किया।
विमर्श में देश के कई एक चर्चित बहुजन बुद्धिजीवी-चिंतक व सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ भागलपुर और बिहार के विभिन्न जिलों से दर्जनों सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हिस्सा लिया।




