कभी आईपीएस और आईएएस रहते थे दरवाजा खोलने को बेताब, आज है बेबस और लाचार!

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर

कभी जिनके इशारों पर सैकड़ों आईपीएस और आईएएस की फौज खड़ी रहती थी। आज लाचार और बेबस होकर जमीन पर बैठना पड़ गया। कहते हैं सत्ता की हनक ज्यादा दिनों तक नहीं टिकती। इंसान को धरातल पर ही आकर जीना पड़ता है। ये हैं सजल चक्रवर्ती चलीए आपको माई याद दिलाता हूं वही सजल चक्रवती जो झारखंड के मुख्य सचिव हुआ करते थे। जिनके गाड़ी के दरवाजा खोलने के लिए कई आईपीएस और आईएएस की लाइन लगी रहती थी। और चारा घोटाले मामले में रांची कोर्ट में पेशी थी। साहेब ऊपर नहीं पहुंच पाए और जमीन पर ही बैठ गए। चक्रवर्ती ने दो शादियां की है। और दोनों बीवियों ने तलाक दे दिया है। भाई बहन सेना में बड़े अवसर थे उन्होंने भी इन्हें छोड़ दिया। जरा सोचिए जिस के दरबारी इतने बड़े बड़े आदमी किया करते थे। आज वह लाचार बेबस तक की निगाहें लगाए किसी की इंतजार देख रहा है। सजा के वक्त कोर्ट्ट में सबके कोई न कोई पहुंचे। लेकिन सजल चक्रवर्ती के कोई नहीं

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