अचला सप्तमी के अवसर पर पुण्यार्क मंदिर में हुई विशेष पूजा-अर्चना

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:- रागिनी शर्मा


पंडारक में गंगा के तट पर स्थित द्वापरयुगीन पुण्यार्क सूर्य मंदिर में मंगलवार को अचला सप्तमी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना आयोजित की गई। मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्यदेव अपने सात घोड़े वाले रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे और पूरी सृष्टि को प्रकाशित किया था। इसी कारण हर साल माघ मास की शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी या सूर्य जयंती के रूप में मनाया जाता है। पंडारक में गंगा स्नान करके पुण्यार्क सूर्य मंदिर में जल अर्पण करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे दिन उमड़ती रही। पंडारक और आसपास के कई गाँवों के लोगों ने इस दिन फलाहार या नमक रहित आहार ग्रहण करके सूर्यदेव की आराधना की। पुण्यार्क मंदिर के मुख्य पुजारी शशि शेखर पाठक सहित एक दर्जन से अधिक शाकलद्वीपी ब्राह्मणों ने मंदिर परिसर में त्रिदिवसीय अनुष्ठान किया तथा देश और समाज की सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र आदि का पाठ किया।

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