रिपोर्ट – सोनू सिंह!
नवादा में फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने वाला शातिर गिरफ्तार, 19 ATM कार्ड समेत भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
नवादा: बिहार के नवादा में सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को नौकरी और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को नगर थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके किराये के मकान से अलग-अलग नामों के पहचान पत्र, 19 एटीएम/डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित बड़ी मात्रा में कूटरचित दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में 44 मामलों में संलिप्तता की बात स्वीकार की है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान शेखपुरा जिले के हथियावां थाना क्षेत्र के बादशाहपुर गांव निवासी सचिन कुमार उर्फ शैलेश कुमार उर्फ संतोष कुमार (करीब 45 वर्ष), पिता ब्रह्मदेव सिंह के रूप में हुई है। वह नवादा शहर में किराये के मकान में रह रहा था।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने की छापेमारी
पुलिस के अनुसार, मंगलवार को नगर थाना को सूचना मिली थी कि शहर में एक व्यक्ति ऑनलाइन साइबर ठगी करने के साथ-साथ आंगनबाड़ी सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे की वसूली कर रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थानाध्यक्ष उमाशंकर सिंह के निर्देश पर पुलिस टीम गठित की गई।
टीम में सब इंस्पेक्टर सानू कुमार के साथ सिपाही विकास कुमार, मनोहर कुमार, अभिषेक कुमार और इंद्रजीत कुमार शामिल थे। पुलिस टीम ने नवादा शहर के सद्भावना चौक के समीप गांधी नगर मोहल्ले में स्थित कारी देवी के मकान में छापेमारी की। मकान के दूसरे तल पर स्थित एक कमरे में आरोपी मिला। पूछताछ के दौरान उसने कई नाम और पहचान बताई, जिसके बाद पुलिस ने कमरे की तलाशी ली।
तलाशी में मिले कई विभागों के फर्जी दस्तावेज
पुलिस के मुताबिक, कमरे की तलाशी के दौरान अलग-अलग नामों से बने आधार कार्ड और पैन कार्ड बरामद हुए। इनमें सचिन कुमार और शैलेश कुमार के नाम से दो अलग-अलग पैन कार्ड मिले, जबकि दोनों पर एक ही व्यक्ति की तस्वीर लगी हुई थी।
इसके अलावा 19 एटीएम/डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक, यूपीआई भुगतान से जुड़े क्यूआर कोड और स्कैनर, मोबाइल फोन एवं सिम कार्ड भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस को आंगनबाड़ी सेविका की उपस्थिति पंजी, निरीक्षण पंजी, आदेश पुस्तिका, सुकन्या योजना से संबंधित आवेदन पंजी, कन्या विवाह योजना के प्रपत्र, विवाह निबंधन के आवेदन प्रपत्र क-1, क-2 एवं क-3 तथा अनाथ बच्चों के चैरिटेबल ट्रस्ट में पंजीकरण से जुड़े कागजात भी मिले हैं। कुछ प्रपत्र भरे हुए थे, जबकि कई खाली थे। बरामद पंजी में लाभुकों के नाम, बैंक खाता संख्या और जमा राशि से संबंधित विवरण भी दर्ज होने की बात सामने आई है।
अधिकारी बनकर गांवों में करता था ठगी
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह अच्छे कपड़े पहनकर और किराये की चार पहिया गाड़ी लेकर अलग-अलग गांवों में जाता था। वहां खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करता था। वह ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को यह विश्वास दिलाता था कि उसे सीडीपीओ की ओर से निरीक्षण और सर्वे के लिए भेजा गया है।
इसके बाद वह आंगनबाड़ी सेविका की नौकरी दिलाने, सुकन्या योजना का लाभ दिलाने, कन्या विवाह योजना की राशि दिलाने और अनाथ बच्चों का चैरिटेबल ट्रस्ट में पंजीकरण कराने के नाम पर गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों से फर्जी आवेदन भरवाकर पैसे वसूलता था।
लोगों का विश्वास जीतने के लिए वह कथित तौर पर फर्जी निरीक्षण पंजी और आंगनबाड़ी सेविका की उपस्थिति पंजी भी दिखाता था। वहीं, फर्जी विवाह प्रमाणपत्र तैयार कर सरकारी सहायता दिलाने का झांसा देकर भी ठगी करने की बात सामने आई है।
44 मामलों में संलिप्तता की बात आई सामने
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके खिलाफ पहले से शेखपुरा, पटना, नालंदा और नवादा जिले के अकबरपुर एवं रजौली सहित विभिन्न थानों में कुल 44 मामले दर्ज हैं। उसने यह भी बताया कि उसके कुछ बैंक खाते साइबर थानों में शिकायत दर्ज होने के बाद फ्रीज किए जा चुके हैं। हालांकि, इन सभी मामलों और आरोपी के दावों का पुलिस सत्यापन कर रही है।
थानाध्यक्ष ने कही विधिसम्मत कार्रवाई की बात
नगर थानाध्यक्ष उमाशंकर सिंह ने बताया कि जिले में साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच की जा रही है। इस मामले में जो भी लोग शामिल पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस बरामद दस्तावेजों, एटीएम कार्ड, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के आधार पर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।



