विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे स्कूली बच्चों को मुख्यमंत्री ने किया पुरस्कृत!

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:- रवि शंकर अमित!

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित राज्यस्तरीय चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता में अव्वल रहे स्कूली बच्चों को मुख्यमंत्री ने किया पुरस्कृत, कहा- आज के विद्यार्थी ही भविष्य के हैं महानायक

मुख्य बिंदु-

‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के तहत आयोजित राज्यस्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ने विजेता विद्यार्थियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएँ।

‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी के साथ बिहार पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा।

विद्यार्थी कल के नायक और महानायक हैं। उनकी प्रतिभा, विचार और संकल्प ही बिहार एवं देश के भविष्य का निर्माण करेंगे।

प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आवास, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।

‘विद्यार्थी साथी ऐप के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑनलाइन देर रात में भी पढ़ाई तथा NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

जीविका दीदियों के माध्यम से एक करोड़ विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।

पटना, 10 अक्टूबर 2026 मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज बापू सभागार, पटना में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय सेवा चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण समारोह का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के अंतर्गत आयोजित राज्यस्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ने सभी विजेता विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी के साथ बिहार का पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कल के नायक और महानायक हैं। यही बिहार और देश के भविष्य हैं। विद्यार्थियों के सपनों, विचारों, प्रतिभा और संकल्प में विकसित बिहार तथा विकसित भारत की नींव समाहित है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और उन्हें अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान, अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि रहा है। मगध ने भारत को स्वर्णिम काल दिया और पंडित चाणक्य ने इसी धरती से अखंड भारत की परिकल्पना की थी। आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश की एकता और अखंडता का सपना पूरा हुआ है। प्राचीन काल से ही नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की इस ऐतिहासिक विरासत को फिर से प्रतिष्ठित करने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है। विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा प्राचीन ज्ञान-संपदा को नुकसान पहुंचाया गया और नालंदा जैसे ज्ञान केंद्रों की विरासत को भारी क्षति हुई। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को पुनः स्थापित करने की पहल के लिए प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी और पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी के प्रति आभार व्यक्त किया। वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार कार्यभार संभालने के बाद आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुत्थान को विशेष महत्व दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देश को केवल ‘सोने की चिड़िया’ बनाने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि ऐसा सशक्त भारत बनाना है, जो विश्व में अपनी क्षमता और सामर्थ्य के साथ दहाड़ सके। मेक इन इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीबों-वंचितों, बच्चों और आम नागरिकों के जीवन में सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार ने लंबे समय तक गरीबी, अभाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना किया है। वर्ष 2014 तक बिहार के गरीब परिवारों को लगभग 42 लाख पक्के मकान उपलब्ध कराए गए थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 62 लाख गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले। इसी तरह केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत बिहार के लगभग 10 करोड़ लोगों को मुफ्त में खाद्यान्न दी जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों को भोजन, आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में 700 मॉडल स्कूलों की व्यवस्था विकसित की गई है, जिसमें करीब 3.5 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से रात में भी ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी रात में पढ़ना पसंद करते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार मॉडल स्कूलों में डिजिटल माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करा रही है। रात एक बजे तक पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.42 लाख है, जबकि शनिवार और रविवार के दिनों में यह संख्या करीब पौने दो लाख तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विद्यार्थियों में पढ़ने की ललक है। सरकार इस उत्साह को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी से भी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में सहयोग का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए टी०आर०ई०-4 के माध्यम से लगभग 33 हजार नए शिक्षकों की बहाली की जा रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य शिक्षकों का चयन कर उन्हें सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री से कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के ऐसे 100 उत्कृष्ट शिक्षकों की पहचान की जाए, जो अपने-अपने विषयों में बेहतर शिक्षण क्षमता रखते हों। चयनित शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सहित दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और अन्य देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की दिशा में काम किया जाए, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण पद्धतियों और शैक्षणिक गुणवत्ता से परिचित होकर बिहार लौटें और यहां के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पी०एम० श्री विद्यालयों की व्यवस्था को भी बेहतर बना रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले साल मार्च तक सभी पी०एम० श्री विद्यालयों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री से कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के ऐसे 100 उत्कृष्ट शिक्षकों की पहचान की जाए, जो अपने-अपने विषयों में बेहतर शिक्षण क्षमता रखते हों। चयनित शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सहित दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और अन्य देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की दिशा में काम किया जाए, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण पद्धतियों और शैक्षणिक गुणवत्ता से परिचित होकर बिहार लौटें और यहां के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पी०एम० श्री विद्यालयों की व्यवस्था को भी बेहतर बना रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले साल मार्च तक सभी पी०एम० श्री विद्यालयों को व्यवस्थित करने और उनकी शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार के लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं लेकिन सरकार चाहती है कि बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न हो। उन्होंने बताया कि बिहार में डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। जुलाई 2026 में 211 स्थानों पर नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई की व्यवस्था की गई, ताकि उच्च शिक्षा की पहुंच अधिक क्षेत्रों तक हो सके। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में शिक्षकों से मुलाकात के दौरान कई लोगों ने बताया कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में पढ़ाते थे। अब उन्हें अपनी मिट्टी की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों का बिहार लौटना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। सरकार का प्रयास है कि बिहार के विद्यार्थियों को अपने राज्य में ही योग्य शिक्षक, बेहतर कॉलेज और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो, ताकि वे यहीं रहकर अपनी प्रतिभा को निखार सकें और राज्य के विकास में योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला शिक्षकों को यथासंभव नजदीकी पंचायत और पुरुष शिक्षकों को नजदीकी प्रखंड में शिक्षण कार्य का अवसर मिल सके। इसके लिए निर्धारित नियमों और नीतियों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर कॉलेजों तक लगभग सात लाख शिक्षक बिहार के बच्चों को शिक्षित करने में योगदान दे रहे हैं। राज्य की करीब 14 करोड़ आबादी में लगभग दो करोड़ बच्चे पहली कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी और विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए शिक्षकों की उपलब्धता, गुणवत्ता और शैक्षणिक सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए ओपन यूनिवर्सिटी की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से संबंधित पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि राज्य के विद्यार्थियों को अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिले। उन्होंने कहा कि अभी बड़ी संख्या में बिहार के बच्चे बाहर जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हमलोग ऐसी व्यवस्था बनाने जा रहे हैं जिससे बड़ी संख्या में बिहार से बाहर पढ़ रहे बच्चे अपने राज्य में ही पढ़ाई कर सकें। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय, कॉलेज और बेहतर शैक्षणिक संस्थान विकसित किए जाएं, तो राज्य के विद्यार्थियों को अपने घर के करीब उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। सरकार दूसरे राज्यों के शैक्षणिक संस्थानों को बिहार में संस्थान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने और आवश्यक प्रोत्साहन देने की दिशा में भी काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पहले सरकार की प्राथमिकता बिजली, सड़क, पानी, खाद्यान्न और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना था। लंबे समय तक इन सुविधाओं के अभाव के कारण विकास की गति प्रभावित हुई। छात्राओं को विद्यालय तक लाने के लिए पोशाक और साइकिल जैसी योजनाओं की जरूरत पड़ी। इन प्रयासों से बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली और आज बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार के सामने दो बड़े लक्ष्य हैं। पहला, बिहार में उद्योगों का जाल बिछाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना, ताकि राज्य के मजदूरों और युवाओं को काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। दूसरा, बिहार में ही अच्छे विद्यालय, कॉलेज और विश्वविद्यालय विकसित करना, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। वर्ष 2030 से पहले बिहार के युवाओं को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस काम किए जा रहे हैं। साथ ही ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि मजदूरों को मजदूरी के लिए राज्य के बाहर जाने की विवशता न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले स्कूली बच्चों की पोशाक के लिए राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती थी, लेकिन कई बार यह राशि बच्चों की पोशाक पर खर्च नहीं कर के पिता दूसरी जगह पर खर्च कर देते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। अब जीविका दीदियों के माध्यम से लगभग एक करोड़ बच्चों के लिए पोशाक सिलवाकर सीधे उन्हें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे बच्चों को समय पर पोशाक मिलने के साथ-साथ जीविका दीदियों के लिए काम और आय के अवसर भी बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सेवा संकल्प और कायाकल्प अभियान के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत स्कूलों की रंगाई-पुताई, मरम्मत, खराब पंखों को ठीक करने और अन्य जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक सरकारी स्कूल में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाने का प्रयास किया जाएगा। मार्च के बाद जब लोग बिहार के सरकारी विद्यालयों को देखेंगे, तो उन्हें बदली हुई तस्वीर दिखाई देगी। विद्यालयों की आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सुविधाओं में सुधार से बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक चेतना, ज्ञान और लोकतांत्रिक आंदोलनों की दृष्टि से बिहार की गौरवशाली परंपरा रही है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां बड़ा आंदोलन हुआ। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब बिहार के बच्चे शिक्षित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल के नायक और महानायक हैं। उनके सपनों को साकार करना सरकार, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहार में 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध कराई और उनके अनुसार, इसी वर्ष इन 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाई शुरू कराने की पहल हुई। उन्होंने इसे बिहार में शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये के बजट में से करीब 78 हजार करोड़ रुपये, यानी लगभग 21 प्रतिशत राशि शिक्षा विभाग पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में कई आवश्यकताओं और चुनौतियों को दूर करना बाकी है। सरकार इन कमियों को दूर करने और विद्यालयों की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार काम करेगी।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े सभी लोगों से बिहार की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार के नौजवानों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और रोजगार से जोड़कर ही विकसित बिहार का सपना पूरा किया जा सकता है।

कार्यक्रम में ‘मेरे सपनों का भारत सेवा चित्र’ अभियान पर आधारित वीडियो फिल्म प्रस्तुत की गई।

कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के सचिव ने पौधा, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता में विजेता 8 छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया।

सेवा ही संकल्प अभियान के तहत आयोजित राज्यस्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता को बिहार में व्यवस्थित एवं बड़े स्तर पर आयोजित करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी को बधाई दी।

कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी, उपमुख्यमंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी, केंद्रीय अपर सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी, केंद्रीय संयुक्त सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग डॉ० अमरप्रीत दुग्गल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण उपस्थित थे।

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