:- रवि शंकर अमित!
मुख्य बिन्दु :-
एस०आई०आर० के दौरान मतदाता सूची में पात्र व्यक्ति का नाम नहीं काटा गया, आपत्ति एवं दावे के लिए पूरी प्रक्रिया रही उपलब्ध। बिहार में एस०आई०आर० की प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है।
निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण संस्था। लोकतंत्र में जनता मालिक है और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन करती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति तेज हुई है। एक गरीब का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना, यह विपक्ष को नहीं पच रहा है। देश अच्छे से चल रहा है, विपक्ष को यह बात पसंद नहीं है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिये वे भ्रम फैलाने में लगे हैं।
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे जनहित के मुद्दों के साथ जनता के बीच जाएं और तथ्यपरक तरीके से अपनी बात रखें।
पटना, 27 सितम्बर 2026 मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बिहार में कराये गये विशेष गहन पुनरीक्षण (एस०आई०आर०) को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करते हुये कहा कि बिहार में एस०आई०आर० की प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 24 जून 2025 से 25 जुलाई 2025 तक एस०आई०आर० की प्रक्रिया चली। एस०आई०आर० के दौरान मतदाता सूची में शामिल नामों का सत्यापन किया गया। उन्होंने कहा कि एस०आई०आर० के दौरान मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों तथा एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों का सत्यापन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों की पात्रता को लेकर कोई समस्या थी, उनके लिए दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध रही। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में जब श्रीमती राबड़ी देवी जी मुख्यमंत्री थीं तब एस०आई०आर० कराया गया था और फिर जब वर्ष 2025 में श्री नीतीश कुमार जी मुख्यमंत्री थे उस समय एस०आई०आर० कराया गया। एस०आई०आर० के नाम पर विपक्ष भ्रम फैला रहा है। विपक्षी नेताओं के पास कोई फैक्ट नहीं है, सिर्फ आरोप लगा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को ऑनलाइन उपलब्ध कराया था, ताकि वर्तमान एस०आई०आर० में पात्र मतदाता अपने पुराने विवरण का सत्यापन कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एस०आई०आर० की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर मतदाता विवरण का सत्यापन किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद आधार कार्ड को भी पहचान संबंधी दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि आधार पहचान स्थापित करने के लिए स्वीकार्य है, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी एवं राजद नेता श्री तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा एस०आई०आर० को लेकर उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा संबंधित मामलों पर स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है अथवा किसी प्रकार की वास्तविक शिकायत है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे सामने लाया जाना चाहिए। अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं आयी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन उन्हें तथ्य और प्रमाण के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव संबंधी किसी शिकायत के लिए निर्वाचन आयोग के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एस०आई०आर० की प्रक्रिया बिहार के सभी क्षेत्रों में निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई है। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग और न्यायालय महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची एक गतिशील सूची है, जिसमें समय-समय पर नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है तथा मृत्यु, स्थानांतरण और अन्य कारणों से आवश्यक संशोधन किए जाते हैं। निर्वाचन आयोग भी मतदाता सूची के नियमित पुनरीक्षण को इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति तेज हुई है। एक गरीब का बेटा देश का प्रधानमंत्री बना, यह विपक्ष को नहीं पच रहा है। देश अच्छे से चल रहा है, विपक्ष को यह बात पसंद नहीं है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिये वे भ्रम फैलाने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार में आवास निर्माण सहित विभिन्न विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब एवं वंचित परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता मालिक है और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन करती है। मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे जनहित के मुद्दों के साथ जनता के बीच जाएं और तथ्यपरक तरीके से अपनी बात रखें।




