आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संयुक्त मंच द्वारा राष्ट्रव्यापी हड़ताल!

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रिपोर्ट – अमित कुमार!

आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संयुक्त मंच द्वारा 11 सितंबर 2026 शुक्रवार को आहूत एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल।

हड़ताल केवल एक सांकेतिक विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों, अपने संस्थान के अस्तित्व और बैंकिंग उद्योग की गरिमा को बचाने का एक निर्णायक आह्वान है। यह हड़ताल उन नीतियों के विरुद्ध है जो लगातार लाभ कमा रहे एक सुदृढ़ सार्वजनिक संस्थान को निजी और विदेशी हाथों में सौंपने का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। आईडीबीआई बैंक आज घाटे का नहीं बल्कि मुनाफा देने वाला, सरकार को लाभांश देने वाला और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला बैंक है। ऐसे में इसके रणनीतिक विनिवेश और निजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखना न तो देशहित में है और न ही बैंक के हजारों कर्मचारियों और लाखों ग्राहकों के हित में। हमारी पहली और सबसे प्रमुख मांग है कि सरकार इस निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करे और बैंक को सार्वजनिक क्षेत्र में ही बनाए रखे।

हमारी दूसरी महत्वपूर्ण मांग परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई से जुड़े द्विपक्षीय समझौतों की पवित्रता को बहाल करने से संबंधित है। प्रबंधन और अधिकारी संगठन के बीच हुए समझौते किसी कागज के टुकड़े नहीं होते बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान की नींव होते हैं। जब प्रबंधन एकतरफा तरीके से इन समझौतों की अवहेलना करता है तो पूरे औद्योगिक संबंधों की व्यवस्था पर चोट पहुंचती है। इसलिए हम मांग करते हैं कि पीएलआई को लेकर हुए सभी द्विपक्षीय समझौतों का अक्षरशः पालन किया जाए और उनकी गरिमा को बनाए रखा जाए।

इसी से जुड़ी हमारी तीसरी मांग पीएलआई के न्यायसंगत और समान भुगतान की है। बैंक की प्रगति में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का योगदान बराबर है, चाहे वह किसी भी ग्रेड या स्केल में हो। इसलिए पीएलआई का भुगतान वार्षिक वेतन के आधार पर आनुपातिक रूप से बिना किसी भेदभाव के सभी को किया जाना चाहिए। किसी विशेष वर्ग को अधिक और दूसरे को कम देकर विभाजन पैदा करना अनुचित है और इससे कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ता है। न्याय तभी होगा जब सभी को समान दृष्टि से देखा जाएगा।

चौथी मांग जो पिछले कई वर्षों से लंबित है वह है पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लागू करना। भारतीय बैंक संघ और कर्मचारी संगठनों के बीच इस पर सहमति बन चुकी है और इसकी संस्तुति भी हो चुकी है। आज जब जीवन शैली में बदलाव आ रहा है, काम का दबाव बढ़ रहा है और कार्य जीवन संतुलन एक बड़ी चुनौती बन गया है, तब बैंक कर्मचारियों को भी सप्ताह में दो दिन का अवकाश मिलना उनका अधिकार है। यह न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य और परिवार के लिए आवश्यक है बल्कि बैंक की उत्पादकता को भी बढ़ाएगा। सरकार और आईबीए इसे अनावश्यक रूप से टाल रहे हैं, जिसे हम अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे।

हमारी पांचवी और अंतिम मांग 8 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित नौवें जॉइंट नोट के लंबित मुद्दों के त्वरित समाधान से है। जॉइंट नोट पर हस्ताक्षर हुए दो वर्ष से अधिक समय हो गया है लेकिन उसके कई महत्वपूर्ण प्रावधान आज भी फाइलों में धूल खा रहे हैं। अधिकारियों की पदोन्नति, वेतन विसंगतियां और अन्य सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। हम चाहते हैं कि आईबीए इन सभी शेष मुद्दों का अविलंब निपटारा करे। इन्हीं पांच न्यायोचित मांगों को लेकर पटना सहित पूरे देश के आईडीबीआई अधिकारी 11 सितंबर को हड़ताल पर रहेंगे।

रोशन कुमार सिंह (सचिव)
ज्ञान प्रकाश (संयुक्त सचिव)
AIIDBIOA, पटना जोन यूनिट

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