रिपोर्ट – अमित कुमार!
बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच फरक्का जल संधि को लेकर सियासत तेज हो गई है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने फरक्का संधि को बिहार के हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार से इसे आगे रिन्यू नहीं करने की मांग की है। संजय झा ने कहा कि बिहार के 12 जिले गंगा किनारे हैं और हर साल बाढ़ की समस्या झेलते हैं। उनका दावा है कि फरक्का डैम भी बिहार में बाढ़ की बड़ी वजहों में से एक है। उन्होंने कहा कि 30 साल की इस संधि की अवधि पूरी होने के बाद बिहार के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे कोई फैसला होना चाहिए।
जेडीयू की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फरक्का जल संधि का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा।
संजय झा ने कहा कि यह कोई चुनावी या राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि बिहार के हक और हित से जुड़ा मामला है।
उनका कहना था कि फरक्का संधि के कारण गंगा का पानी बांग्लादेश चला जाता है, जबकि बिहार को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल के समय हुई संधि पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार के हिस्से के पानी को लेकर राज्य के हितों का ध्यान नहीं रखा गया।
संजय झा ने कहा कि बिहार में एक तरफ बाढ़ की समस्या है, तो दूसरी तरफ कई इलाकों में पानी की कमी भी है। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों में गंगा का पानी करीब 100 किलोमीटर दूर तक पंप के जरिए पहुंचाना पड़ता है।
जेडीयू नेता ने कहा कि गंगा बिहार से होकर बहती है, लेकिन फरक्का संधि के तहत साल के कई महीनों में बिहार को गंगा के पानी के इस्तेमाल को लेकर सीमाएं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में बिहार के भविष्य की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
संजय झा ने कहा कि फरक्का जल संधि की 30 साल की अवधि पूरी हो रही है और 12 दिसंबर के बाद इसे आगे बढ़ाने से पहले बिहार की आबादी और भविष्य की जरूरतों का आकलन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 2050 तक बिहार की आबादी और पानी की जरूरत कितनी होगी, इसका आकलन कर फैसला लिया जाना चाहिए। जेडीयू का आरोप है कि बिहार में उद्योगों के अपेक्षित विकास में पानी की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती है।
बाढ़ पीड़ितों को केंद्र से आर्थिक मदद देने की तेजस्वी यादव की मांग पर भी संजय झा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपने स्तर पर बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता पहुंचाने का काम कर रही है।
वहीं बख्तियारपुर का नाम बदलकर नीतीश कुमार के नाम पर रखने की मांग पर संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार काम करने वाले व्यक्ति हैं और वह नाम बदलने में विश्वास नहीं रखते।
उन्होंने कहा कि बख्तियार खिलजी का इतिहास बख्तियारपुर से जुड़ा है और इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता। संजय झा ने कहा कि बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाया था, जबकि नीतीश कुमार ने नालंदा विश्वविद्यालय को दोबारा खड़ा करने का काम किया और आज वहां कई देशों के छात्र पढ़ रहे हैं।
वहीं अनंत सिंह के लगातार जेडीयू नेताओं के खिलाफ दिए जा रहे बयानों पर संजय झा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष इस पूरे मामले को देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस तरह की बातें सामने आती हैं, फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है। पार्टी जो भी फैसला करेगी, परिस्थितियों को देखते हुए करेगी।
यानी बिहार में बाढ़ और गंगा के पानी के मुद्दे के बीच जेडीयू ने फरक्का जल संधि को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति साफ कर दी है। अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समझौते से जुड़े इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का अगला कदम क्या होता है।



