रिपोर्ट – निभाष मोदी!
कमर तक पानी, छतों पर जिंदगी! गंगा के रौद्र रूप से भागलपुर बेहाल—वार्ड 1, 9 और 10 में घर बने जलाशय, पानी चीरकर निकलने को मजबूर लोग
भागलपुर। 08 सितंबर 2026,गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने अब भागलपुर के ग्रामीण और दियारा इलाकों के बाद शहर के रिहायशी इलाकों में भी दस्तक दे दी है। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 1, 9 और 10 में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं और लोग पानी के बीच से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। वहीं, जिन घरों के निचले हिस्से में पानी घुस चुका है, वहां परिवारों ने छतों पर शरण ले ली है।बाढ़ प्रभावित इलाकों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद शहर में चिंता बढ़ गई है। गलियों में पानी बह रहा है, घरों के निचले हिस्से डूब चुके हैं और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। सड़क और घर के बीच का फर्क मिट चुका है। जरूरत का सामान लेने के लिए लोगों को बाढ़ के पानी में उतरकर आवाजाही करनी पड़ रही है।सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को हो रही है। घर में पानी घुसने के बाद खाना पकाने से लेकर पीने का पानी जुटाने और बच्चों की जरूरत का सामान उपलब्ध कराने तक की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवारों के लिए घर में रहना मुश्किल हो गया है और वे सुरक्षित रहने के लिए घर की छतों का सहारा ले रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी केवल घरों तक ही नहीं पहुंचा, बल्कि शहरी क्षेत्र के कुछ स्कूलों में भी पानी प्रवेश कर गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बाढ़ के बीच स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों को सुरक्षित स्थान, पीने का पानी, भोजन, दवा और अन्य जरूरी सुविधाओं की जरूरत है। उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में राहत कार्य तेज किए जाने चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को किसी तरह की बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े।वहीं, शांति समिति के सदस्य एवं समाजसेवी संजय कुमार यादव ने कहा कि नगर निगम का वार्ड नंबर 19 भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है और यहां जलस्तर काफी ऊंचा है। उनके अनुसार प्रभावित लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि बाढ़ के दौरान तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ बाढ़ खत्म होने के बाद स्थायी समाधान की दिशा में भी काम किया जाए।संजय कुमार यादव का कहना है कि भागलपुर में हर साल बाढ़ और कटाव की समस्या सामने आती है। इसलिए केवल बाढ़ आने के बाद राहत देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि सुखाड़ के समय ही कटावरोधी और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े स्थायी कार्य किए जाएं, ताकि अगले साल फिर लोगों को इसी तरह पानी के बीच जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर न होना पड़े।फिलहाल गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच भागलपुर के शहरी इलाकों की तस्वीरें प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। कहीं सड़कें पानी में डूबी हैं तो कहीं लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं। अब बाढ़ प्रभावित परिवारों की नजर प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी है—क्योंकि पानी बढ़ रहा है और लोगों की मुश्किलें भी लगातार गहराती जा रही हैं।




