रिपोर्ट – मनोज कुमार!
बेतिया। नेपाल के रसुआ जिले में आई भीषण बाढ़ और मलबे की त्रासदी ने पश्चिम चंपारण के चनपटिया के तीन परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। समीर अंसारी, मोख्तार मियां और अरमान आलम नेपाल में रोजी-रोटी कमाने गए थे, लेकिन हादसे के बाद से तीनों का कोई सुराग नहीं है। चार मजदूर सुरक्षित घर लौट आए हैं, मगर तीन परिवारों की आंखें अब भी अपनों की राह देख रही हैं।
हादसे के वक्त तीनों मजदूर गणेश होटल में फर्नीचर और टाइल्स लगाने का काम कर रहे थे। अचानक धुआं जैसा दिखाई दिया और कुछ ही देर में पानी व मलबे का तेज बहाव सबकुछ अपने साथ बहाने लगा। जान बचाने के लिए मची भगदड़ में तीनों मजदूर अपने साथियों से बिछड़ गए। इसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हो सका।
इसी हादसे से बचकर चार मजदूर किसी तरह घर लौटे हैं। इनमें नेयाज आलम भी शामिल हैं। नेयाज उसी समूह के साथ काम करता था, लेकिन घटना के समय वह दूसरी साइट पर था। जब वह वापस पहुंचा तो उसके तीनों साथी वहां नहीं मिले।
सबसे दर्दनाक तस्वीर अरमान आलम के घर की है। पत्नी शहरून खातून और चार बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटा सलमान नेपाल से सुरक्षित लौट आया, लेकिन पिता के लौटने का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ।
मोख्तार मियां के दो बेटे और एक बेटी हैं, जबकि समीर पांच भाइयों में सबसे छोटे और अविवाहित हैं। तीनों घरों में चूल्हे ठंडे हैं, आंखों में आंसू हैं और दरवाजे पर टिकी हर नजर सिर्फ एक खबर का इंतजार कर रही है,अपने लौट आए।
चार मजदूर लौट आए, लेकिन तीन परिवारों की सांसें अब भी अटकी हैं। बाढ़ का पानी उतर रहा है, मगर इन घरों में इंतजार की लहरें अब भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं।



