रिपोर्ट – अभिषेक कुमार
गया में 20 सूत्री मांगों को लेकर किसान-मजदूर संगठनों का जेल भरो आंदोलन
चार लेबर कोड रद्द करने सहित 20 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को गया में जनसंगठनों ने जेल भरो आंदोलन किया। बिहार राज्य किसान सभा, सीटू, खेत मजदूर यूनियन, जनवादी महिला समिति, भारत की जनवादी नौजवान सभा, आंगनबाड़ी सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल हुए।
आंदोलन की शुरुआत गांधी मैदान से हुई। यहां से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में निकले। हाथों में झंडे और मांगों से जुड़े बैनर थे। कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। सड़कों पर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘किसान-मजदूर, नौजवान-महिला एकता जिंदाबाद’ के नारे गूंजते रहे।
जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए समाहरणालय पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए। कुछ देर के लिए आवागमन बाधित हो गया। समाहरणालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस ने आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी की तैयारी शुरू कर दी।
इसके बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी देना शुरू किया। उन्हें प्रिजनर वैन बिठाया गया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पैदल सिविल लाइंस थाना पहुंचे। वहां भी उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दी। हालांकि, देर तक पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या की औपचारिक जानकारी नहीं दी गयी।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता अजय कुमार वर्मा ने किया। आंगनबाड़ी नेत्री मंजू कुमारी सहित अन्य नेताओं ने भी आंदोलन में भाग लिया।
किसान नेता अजय कुमार ने कहा कि दिल्ली में 28 और 29 जुलाई को हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर में जेल भरो आंदोलन का निर्णय लिया गया था। इसी के तहत गया में भी आंदोलन किया गया है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी होनी चाहिए। किसान और खेत मजदूरों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने कृषि कानून वापस लेने की बात कही थी। किसानों को लागत का डेढ़ गुना कीमत देने का भरोसा भी दिया गया था। इसके बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
चार लेबर कोड वापस लेने की मांग
आंदोलनकारियों ने चारों लेबर कोड रद्द करने की मांग की। ठेका, संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने की भी मांग की गयी। सभी स्वीकृत पदों पर नियमित बहाली की मांग उठी।
आंगनबाड़ी, आशा, रसोइया और अन्य योजना कर्मियों को स्थायी करने की मांग भी की गयी। उन्हें तत्काल 26 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय देने की मांग रखी गयी।
बिजली और जमीन के मुद्दे भी उठे
आंदोलनकारियों ने बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की। स्मार्ट प्रीपेड मीटर वापस लेने की भी मांग की गयी। बटाईदार और पट्टेदार किसानों का निबंधन कर सरकारी सुविधाएं देने की मांग उठी।
ग्रामीण क्षेत्रों का होल्डिंग टैक्स वापस लेने और स्टेट हाइवे पर प्रस्तावित टोल टैक्स बंद करने की मांग भी की गयी। भूमिहीन और गृहविहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन देने की मांग की गयी।
राशन कार्ड से नाम काटना बंद करने और खाद्य सुरक्षा की गारंटी की मांग भी आंदोलनकारियों ने रखी।
गया को सुखाड़ घोषित करने की मांग
आंदोलनकारियों ने गया जिले को सुखाड़ घोषित करने की मांग की। पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने की भी मांग की गयी। अंचलों में परिमार्जन और जमाबंदी से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग उठी।
बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने और पेट्रोलियम व गैस के दाम कम करने की मांग भी की गयी।
महिला, दलित और कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोकने की मांग की गयी। बलात्कार की घटनाओं पर रोक लगाने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग भी आंदोलन के दौरान उठी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग के साथ आंदोलनकारियों ने गिरफ्तारी दी।
बाईट – माले नेता
बाईट – माले नेता
रिपोर्ट – अभिषेक कुमार
गया



