प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ गरजा वीकेएसयू, सैकड़ों शिक्षक-कर्मचारियों ने दिया धरना!

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आरा/आशुतोष पाण्डेय

महाविद्यालयों को सीधे सरकारी नियंत्रण में लेने का विरोध, स्वायत्तता से समझौता नहीं करने का लिया संकल्प

आरा। बिहार के प्रस्तावित नए विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सोमवार को वीकेएसयू के नूतन परिसर स्थित प्रशासनिक भवन के समक्ष विशाल धरना एवं प्रदर्शन किया गया। धरने में विश्वविद्यालय के विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों, स्नातकोत्तर विभागों के सैकड़ों शिक्षक तथा प्रशासनिक विभागों के शिक्षकेत्तर कर्मचारी शामिल हुए।

वक्ताओं ने बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 एवं पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को समाप्त कर नए अधिनियम लाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी। विशेष रूप से महाविद्यालयों का प्रशासनिक नियंत्रण विश्वविद्यालयों से लेकर सीधे सरकार के अधीन करने के प्रस्ताव को उच्च शिक्षा के लोकतांत्रिक एवं अकादमिक स्वरूप के लिए गंभीर खतरा बताया गया।

धरने को संबोधित करते हुए वकुटा अध्यक्ष प्रो. चंचल पाण्डेय एवं वकुस्टा अध्यक्ष प्रो. दिवाकर पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान अधिनियमों ने लंबे समय से विश्वविद्यालयों के लोकतांत्रिक एवं स्वायत्त स्वरूप की रक्षा की है। प्रस्तावित कानून से प्रशासनिक एवं वित्तीय मामलों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

वकुस्टा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से समझौता उच्च शिक्षा के भविष्य को प्रभावित करेगा। वहीं वकुटा सचिव डॉ. शशि भूषण राय ने कहा कि यदि प्रस्तावित विधेयक वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक एवं निर्णायक बनाया जाएगा।

वकुटा कोषाध्यक्ष डॉ. आनंद भूषण पाण्डेय ने शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की एकजुटता की सराहना करते हुए बिल का विरोध किया। शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शशिरंजन उर्फ गुड्डू ने भी प्रस्तावित अधिनियम के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। भोजपुर जिला अध्यक्ष डॉ. खुशबू कुमारी ने मंच का संचालन किया।

सच्चिदानंद महाविद्यालय के सचिव डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करने वाला कोई भी प्रावधान स्वीकार नहीं किया जाएगा। वाकूसटा उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी कुमारी, स्नातकोत्तर शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार एवं सचिव डॉ. आमिर महमूद ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अधिकार, सम्मान एवं सेवा-सुरक्षा से समझौता नहीं करने की बात कही।

मोर्चा की प्रमुख मांगें

मोर्चा ने बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 एवं पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को यथावत रखने, महाविद्यालयों का प्रशासनिक नियंत्रण विश्वविद्यालयों के अधीन ही रखने तथा उन्हें सीधे सरकार के अधीन करने का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। इसके अलावा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित करने वाले प्रस्तावित अधिनियम को निरस्त करने और शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की लंबित मांगों व वेतन विसंगतियों का शीघ्र समाधान करने की मांग भी उठाई गई।

धरने के समापन पर मोर्चा के प्रतिनिधियों ने महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा। कार्यक्रम के अंत में प्रो. नियाज़ हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

वहीं, धरने के दौरान दिवंगत शिक्षक नेता प्रो. कन्हैया बहादुर को याद करते हुए शिक्षक हित में उनके योगदान का उल्लेख किया गया। इसके बाद सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

मोर्चा ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रस्तावित अधिनियम वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन चरणबद्ध एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।

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